नई दिल्ली. सरकार मछली पालन को बढ़ावा देने का काम कर रही है. शायद यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में मछली पालन का काम तेजी से बढ़ रहा है. मछली पालन करके ग्रामीण अच्छी कमाई भी कर रहे हैं. यदि आप भी मछली पालन करना चाहते हैं या कर रहे हैं तो कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां हैं, जिनसे आपको बचना होगा, नहीं तो इससे मछली पालन के काम में आपको फायदे की जगह नुकसान हो जाएगा. अगर आप भी ये जानना चाहते हैं कि वो गलतियां क्या हैं तो यहां हम आपको डिटेल में यही बताएंगे.
भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग (Department of Fisheries, Government of India) के मुताबिक अक्सर मछली किसानों को मछली पालन की कुछ बारीकियां के बारे में पता नहीं होता है. इससे उन्हें फसल तैयार होते वक्त मछलियों की ग्रोथ बेहतर नहीं मिलती है. उत्पादन भी अच्छा नहीं मिलता है. इससे मछली पालन के काम में उन्हें नुकसान होता है और वह मछली पालन का काम बंद कर देते हैं.
किन बातों पर ध्यान देना है
एक्सपर्ट के मुताबिक मछली पालन में कभी भी मछली के बच्चों को सीधे तालाब में नहीं डालना चाहिए. बल्कि उन्हें नर्सरी तालाब में 3 से 6 महीने रखना चाहिए.
इससे उन्हें शुरुआती दिनों में तेजी से विकास करने में मदद मिलती है. नर्सरी में पानी साफ सुथरा होना चाहिए.
गंदे पानी में मछली के बच्चे जल्दी बीमार पड़ सकते हैं. अच्छी ग्रोथ के लिए आप उन्हें सरसों की खल, चावल के छिलके खिला सकते हैं.
अक्सर तालाब का पानी गंदा होता है. उसमें ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. इससे मछलियां जल्दी बीमार पड़ जाती हैं और उनकी ग्रोथ रुक जाती है.
इसलिए समय-समय पर पानी को साफ करना बेहद जरूरी है और तालाब में ताजे पानी की आपूर्ति करना भी जरूरी है. यदि तालाब में शैवाल की परत दिखे तो उसे साफ करें.
मछलियों को फीड खिलाने में भी अक्सर मछली पालकों से गलती होती है. आपको बता दें कि मछलियों को सरसों की खल, चावल की भूसी, मक्का का चूरा फीड में मिलाकर देना चाहिए.
क्योंकि दाने में प्रोटीन की मात्रा सही होना जरूरी है. तभी उनकी ग्रोथ अच्छी होगी और फीड को डालते समय इस बात का ध्यान रखें कि फीड दिन में दो बार डालें.
निष्कर्ष
यदि आप इस तरह से मछली पालन करते हैं तो इससे मछलियों की ग्रोथ भी अच्छी होगी और आपको उत्पादन बेहतर मिलेगा. जिसका फायदा मछली पालन के काम में आपको होगा.












