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Fish Farming: तालाब के पानी का नहीं रखेंगे ध्यान तो डूब जाएगा मछली पालन का बिजनेस

Animal Husbandry, Fish, Duck Farming, Poultry Farming
रूपेश कुमार का तालाब

नई दिल्ली. इसमें कोई शक नहीं है कि मछली पालन एक अच्छा काम है और इसे करके आपको कमाई भी कर सकते हैं लेकिन इसके साथ-साथ यह भी सच है कि मछली पालन में भी दूसरे बिजनेस की तरह दिक्कतें आती हैं. बस जरूरत इस बात की है कि इन दिक्कतों की सही वक्त पर पहचान हो जाए. ताकि मछली पालन में कोई नुकसान ना हो और आप इस व्यवसाय में अच्छा कर सकें. अक्सर मछली पालक भाइयों की शिकायत रहती है कि उनके तालाब में पल रही मछलियों की ग्रोथ इतनी तेजी से नहीं हो रही जितनी तेजी से होना चाहिए. कई बार तो ऐसा भी हो जाता है कि मछलियों की अचानक मौत होने लगती है. जिससे मछली पालक भाई बिल्कुल घबरा जाते हैं और उन्हें ऐसा लगने लगता है कि अब उनका बिजनेस पूरी तरह से डूब जाएगा.

एक्सपर्ट का कहना है कि बहुत से मछली पालक भाई यह सोचते हैं कि ऐसा मछलियों के बीमार होने की वजह से होता है. असल में वो मछलियों का जितना ज्यादा ख्याल रखते हैं उतना ज्यादा तालाब या उसमें मौजूद पानी का नहीं रखते. जबकि मछलियों के साथ-साथ तालाब और पानी कभी ध्यान रखना बेहद ही जरूरी है. क्योंकि इस काम में की गई लापरवाही की वजह से भी मछलियों की ग्रोथ पर असर पड़ता है. साथ ही मछलियों की मौत भी हो जाती है. आइए जानते हैं कि पानी खराब है तो उसकी पहचान कैसे की जाए उसमें सुधार कैसे किया जाए.

क्या उपाय करना है जानें यहां
फिश एक्सपर्ट का कहना है कि पानी के सुधार के लिए सबसे पहले तो पीएच लेवल की जांच करना चाहिए.

तालाब के पानी का पीएच 7.5 से 8.5 होना चाहिए. अगर पानी ज्यादा एसिडिक खट्टा है तो उसमें पल रही मछलियां फीड को खाना ही छोड़ देंगे.

इसके नतीजे में मछलियों की ग्रोथ पर बहुत बुरा असर पड़ेगा और मछली पालक भाई को इससे नुकसान होना तय है.

इसे ठीक करने के लिए एक एकड़ के तालाब में जरूरत के हिसाब से चूना डाला जाता है. इससे पानी का बैलेंस एकदम सही हो जाता है.

मछली पालक को तालाब के अंदर ऑक्सीजन का इंतजाम करना चाहिए. अगर सुबह-सुबह मछलियां सतह पर जाकर मुंह चला रही हैं तो समझ लीजिए कि पानी में ऑक्सीजन की कमी हो गई है.

इसके लिए एयरेटर चलाया जाता है. जिससे ऑक्सीजन लेवल मेंटेन हो जाता है. देसी जुगाड़ के तौर पर नाव चलाएं या फिर डंडों से पानी को पीटा जाता है.

पानी के रंग पर भी ध्यान देना चाहिए. पानी का रंग हल्का हरा है तो इसका मतलब यह है कि तालाब में प्राकृतिक भोजन है.

वहीं अगर पानी गहरा काला या नीला पड़ जाए तो या फिर उसके अंदर बदबू आ रही है तो तुरंत ही पोटेशियम परमैग्नेनेट का छिड़काव करना चाहिए.

वहीं इसका एक दूसरा तरीका यह भी है कि तालाब के अंदर थोड़ा सा पानी बदल देना चाहिए. इससे भी पानी सही हो जाता है.

Written by
Livestock Animal News Team

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