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Fisheries Sector: जीएसटी दरों में सुधार से क्या होगा फिशरीज सेक्टर को फायदा, जानें यहां

फिश एक्सपर्ट का कहना है कि मछली सेहत के लिए फायदेमंद है.
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. जीएसटी दरों में सुधार करने के सरकार के फैसले से हर सेक्टर को कुछ ना कुछ फायदा मिल रहा है. वहीं फिशरीज सेक्टर भी से अछूता नहीं रहा है. यहां भी जीएसटी दरों में सुधार की वजह से फायदा मिल रहा है. भारत सरकार के मत्स्य विभाग (Department of Fisheries India) की ओर से पेश किए गए आंकड़ों पर गौर किया जाए तो कंपोस्टिंग मशीन, सल्फर यूरिक व नाइट्रिक एसिड अमोनिया और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पर अब सिर्फ 5 फीसद जीएसटी कि दर लागू होगी. इसे तालाब की तैयारी पोषण प्रबंधन और जल गुणवत्ता सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

इसके फायदे की बात की जाए तो कंपोस्टिंग मशीन अब सस्ती होगी. जिससे जैविक खाद का उपयोग बढ़ेगा और मछली उत्पादन में भी इसका सीधा फायदा होगा. जिससे किसानों को फायदा पहुंचने की बात कही जा रही है.

जानें फायदों के बारे में
विभाग के मुताबिक रसायनों की कीमतें घटने से पीएच स्तर, विषैला तत्वों और पल्लवक वृद्धि को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा. जिसका असर मछलियों की ग्रोथ पर पड़ता है और जिससे उत्पादन प्रभावित होता है.

डीजल इंजन पंप, एयरेटर स्प्रिंकलर में बचत होगी. जिससे किसान इन मशीनों को खरीद पाएंगे. डीजल इंजन से लेकर पंप एयरटेर और स्प्रिंकलर समेत सभी चीजों की मछली पालन में बेहद जरूरत होती है.

इन चीजों के सस्ते होने से छोटे किसान भी अब आसानी से मशीनरी को खरीद पाएंगे और इसका इस्तेमाल करके मछली उत्पादन को बढ़ा सकेंगे. इससे उनकी इनकम भी ज्यादा होगी.

इतना ही नहीं, इससे लागत कम होगी. उत्पादकता ज्यादा होगी. जिसका फायदा आम लोगों को भी मिलेगा. जब लागत कम होगी तो मछली और झींगा जैसे खाद्य सस्ते होंगे.

आपको बता दें की मछली पकड़ने के लिए गियर जाल और मछली फार्म के लिए जरूरी उपकरण पंप, एयरेटर और तमाम मशीनरी पर पहले 12 से 18 परसेंट तक जीएसटी था, जिसे घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है.

सरकार की तरफ से प्रोसेसिंग मछली और समुद्री खाद उत्पादन पर भी जीएसटी को 12 से 5 फीसद कर दिया गया है. जिससे मछली उत्पाद सस्ते होंगे. घरेलू कस्टमर को किफायती दरों पर समुद्री ​मछली उत्पाद मिलेंगे.

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