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FSSAI ने लगाई A1 और A2 के नाम से बिकने वाले घी-मक्खन पर रोक, जानें क्या है वजह

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने बाजार में बिक रहे A1 और A2 घी और मक्खन पर रोक लगा दी है. अब बाजार में A1 व A2 के नाम से अगर कोई घी या मक्खन बेचता है तो वह कार्रवाई के दायरे में आ जाएगा. एफएसएसएआई के डायरेक्टर इनोशी शर्मा की ओर से एक पत्र जारी किया गया है और उन्होंने इसमें कहा है कि उन्हें लगातार यह जानकारी मिल रही थी कि फूड बिजनेस ऑपरेटर एफएसएसएआई लाइसेंस संख्या या पंजीकरण प्रमाण संख्या के तहत A1 और A2 के नाम से दूध और दूध से बने प्रोडक्ट घी मक्खन दही आदि की बिक्री कर रहे हैं. जबकि A1 और A2 दूध का संबंध प्रोटीन बीटा केसिन से है. इसलिए दूध और फैट उत्पादों में किसी भी A2 दावे का इस्तेमाल बहुत ही गलत है.

यह एफएसएस अधिनियम 2006 और उसके तहत बनाए गये रेगुलेशन के तहत निर्धारित प्रधानों के अनुरूप नहीं है. उन्होंने बताया कि खासतौर पर ई-कॉमर्स प्लेटफार्म और सोशल मीडिया पर A2 के नाम से घी मक्खन बेचने की बाढ़ सी आ गई है. ऐसे लोग दावा करते हैं कि वो देसी गाय के A2 दूध से बना है और ऐसे घी के रेट की बात की जाए तो बाजार में 2000 रुपये किलो तक बेचा जाता है. वहीं कई लोग 3000 रुपये किलो तक भी से बेच दे रहे हैं. घी ही नहीं और भी डेयरी प्रोडक्ट A2 दूध से बने होने का दावा करते हुए बेचा जा रहा है. जिस वजह से 21 अगस्त को फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इस पर रोक लगाने का फैसला किया है.

अब नहीं बेच बचाएंगे
जारी किए गये पत्र में कहा गया है कि फूड बिजनेस ऑपरेटर अब दूध और दूध से बने प्रोडक्ट को A2 व A1 का फर्क करते हुए नहीं बेच सकते हैं. इस पर तत्काल प्रभाव से रोग लगाई जा रही है. हालांकि फूड बिजनेस ऑपरेटर के पास फ्री प्रिंटेड लेवल को खत्म करने के लिए 6 महीने का वक्त भी दिया गया है लेकिन साथ ही यह भी कहा गया कि इसके बाद ऑपरेटर को कोई वक्त नहीं दिया जाएगा. साथ ही उन्हें चेतावनी भी जारी की गई है कि अपनी वेबसाइट से A1 और A2 प्रोटीन से संबंधित दवा को फौरन ही रिमूव कर दें.

आसानी से हो जाता है हजम
डेरी एक्सपर्ट डॉ दिनेश भोंसले कहते हैं कि गए और भैंस के दूध में मौजूद प्रोटीन में कुछ हिस्सा बीटा केसिन होता है लेकिन यह भी दो तरह का होता है. इसे सामान्य भाषा में इस तरह समझ सकते हैं कि जो बीटा किसी गाय दूध में होता है. वह आसानी से हजम हो जाता है, लेकिन भैंस का दूध हजम करने में कुछ लोगों को परेशानी होती है. हजम होने वाली बीटा केसिन भी खास तौर पर देसी नस्ल की गाय जैसे साहिवाल, गिर राठी आदि में पाया जाता है.

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