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Gadvasu: दूध उत्पादन में क्या है ग्लूकोज की भूमिका, कैसे बढ़ जाती है गुणवत्ता, जानिए विशेषज्ञों से

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गडवासु में अतिथि को बुके देकर स्वागत करते यूनिवर्सिटी के अधिकारी.

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी ने स्टेम कोशिकाओं और पशु स्तन ग्रंथियों के जीव विज्ञान पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया. सेमिनार में स्टेम सेल अनुसंधान और पशु स्तनधारी ग्रंथियों के जीव विज्ञान में हालिया विकास विषय पर चर्चा की गई. कार्यशालामें दूध उत्पादन में ग्लूकोज की भूमिका पर प्रकाश डाला. स्तन ग्रंथि स्वास्थ्य और दूध की गुणवत्ता के लिए इसके महत्व पर जोर दिया. विशेषज्ञों ने बताया कि स्तन के अंदर पार्श्व संवदी तंत्रिकाएं होती हैं, जो थन चूसने पर या दाहन पर इन आवगों को मेरुज्जा से ले जाकर पश्व-पीयुपिका तक तक पहुंचती है.पीयुपिका में आक्सीटोसिन हार्मोन का निमार्ण होता है. जहां से यह रक्त द्वारा थन की ग्रंथियां में पहुंचता है और कोष्ठक को संकुचित कर दूध निकालता है. दूध की गुणवत्ता भी बढ़ जाती है।

गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी में आयोजित किए गए कार्यक्रम में पशु जैव प्रौद्योगिकी के स्नातकोत्तर छात्रों में जानकारी बढ़ाने के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित परियोजना की गतिविधि के तहत किया गया था. सेंटर फॉर वन हेल्थ के निदेशक डॉ. जसबीर सिंह बेदी ने अतिथि वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत किया. उन्होंने कार्यशाला के महत्व के बारे में विस्तार से बताया. डॉक्टर इंद्रजीत सिंह, वाइस चांसलर ने प्रतिभागियों से सार्थक चर्चा और सहयोग में शामिल होने का आग्रह किया.

दूध उत्पादन में ग्लूकोज की भूमिका को बताया
डॉक्टर हरमनजीत सिंह बंगा, रजिस्ट्रार और अनुसंधान निदेशक डॉक्टर जतिंदर पाल सिंह गिल ने युवा छात्रों को प्रेरित करने और संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसी कार्यशाला के महत्व पर जोर दिया. डॉ जेम्स शर्ली ने काइनेटिक स्टेम सेल काउंटिंग का वर्णन किया, यह एक महत्वपूर्ण तकनीक है जो प्रोटीन मार्करों के बिना स्टेम सेल आबादी के सटीक माप को सक्षम करती है, जिससे संभावित रूप से अनुसंधान और उपचार में तेजी आती है. वरमोंट विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर फेंग क्यूई झाओ ने दूध उत्पादन में ग्लूकोज की भूमिका पर प्रकाश डाला. स्तन ग्रंथि स्वास्थ्य और दूध की गुणवत्ता के लिए इसके महत्व पर जोर दिया.

30 यूनिवर्सिटी के सदस्यों ने लिया भाग
डॉक्टर रतन कुमार चौधरी ने बताया कि गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी ने स्टेम कोशिकाओं और पशु स्तन ग्रंथियों के जीव विज्ञान पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया. कार्यशाला में वेटरनरी विश्वविद्यालय के शिक्षकों सहित 30 भारतीय विश्वविद्यालयों के 104 सदस्यों ने भाग लिया. डॉ. बलबीर बगीचा सिंह ने सभी अधिकारियों, आयोजकों, प्रतिभागियों और प्रायोजकों को धन्यवाद दिया.

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