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Goat Disease: बकरियों को PPR से कैसे बचाएं, इसके लक्षण क्या हैं, सरकार ने उठया ये कदम

कीड़े बकरे के पेट में हो जाएं तो उसकी ग्रोथ रुकना तय है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. पशुपालन में सबसे ज्यादा नुकसान बीमारी के कारण होता है. पहला नुकसान ये होता है कि उत्पादन नहीं मिलता है. अगर मामला गंभीर स्थिति में पहुंच जाए तो फिर पशुपालन का काम ही बंद हो जाता है. यही वजह है कि पशुपालन करने वाले किसान भाई हमेशा इस कोशिश में रहते हैं कि पशु को बीमारियों से बचाया जाए. बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग (Department of Animal and Fisheries Resources) की मानें तो बकरियों में पीपीआर रोग (Paste of little ruminants) बड़ा ही खतरनाक होता है.

विभाग की ओर से साझा की गई जानकारी को लाइव स्टक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) आपके लिए यहां लाया है ताकि आप अपनी बकरियों को पीपीआर बीमारी से बचा सकें. आइए जानते हैं.

पीपीआर (बकरी प्लेग) बीमारी क्या है ?
पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स), वायरस से होने वाली एक संक्रामक व छुआछूत बीमारी बीमारी है.

इसे बकरियों की महामारी या बकरी प्लेग भी कहा जाता है. कई अन्य घरेलू जानवर और जंगली जानवर भी इस बीमारी से संक्रमित होते हैं.

पीपीआर बीमारी में मृत्यु दर आमतौर पर 50 से 80 प्रतिशत होती है, जो बहुत गंभीर मामलों में 100 प्रतिशत तक बढ़ सकती है.

पीपीआर रोग के लक्षण क्या हैं?
प्रभावित होने वाले जानवर में शुरुआत में तेज बुखार (104-106°F) आता है.

मुंह के अंदर, जीभ, होंठ तालू व मसूड़ों के अंदर, खुरों के बीच तथा थनों पर छाले पड़ जाते हैं.

टोगी पशुओं के मुंह से अधिक पारदर्शी लार गिरती है.

कमजोरी भी इस रोग के लक्षण हैं.

भूख कम लगना, जुगाली कम करना.

पैरो में घाव के कारण पशुओं का लंगड़ा कर चलना.

दूध उत्पादन में गिरावट.

गर्भवती पशुओं में गर्भपात की संभावना बनी रहती है.

कहां से मिलती है मदद
बकरियों एवं भेड़ों को पीपीआर रोग से बचाने के लिए बिहार में 25 फरवरी 2025 से
मुफ्त वैक्सीनेशन किया जा रहा है.

इस तरीके से टीकाकर्मियों द्वारा 4 माह से उपर के मैमनों, भेड़ों एवं बकरियों का पीपीआर रोग से बचाव के लिए फ्री वैक्सीनेशन किया जा रहा है.

अहम जानकारी के लिए फोन नंबर 0612-2226049 अथवा 0612-2230942 पर कर सकते हैं. या @BiharAFRD पर संपर्क किया जा सकता है.

Written by
Livestock Animal News Team

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