Home डेयरी Government Scheme: बिहार में महिलाएं मछली-दूध उत्पादन को बढ़ाएंगी, ​सरकार ने दी ये अहम जिम्मेदारी
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Government Scheme: बिहार में महिलाएं मछली-दूध उत्पादन को बढ़ाएंगी, ​सरकार ने दी ये अहम जिम्मेदारी

प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बिहार में अब मछली और दूध के उत्पादन की जिम्मेदारी महिलाओं के कांधों पर होगी. वो इसे बढ़ाकर अपनी का​बीलियत साबित करेंगी. असल, में डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग दूध और मछली उत्पादन बढ़ाने का जिम्मा महिलाओं को सौंपने जा रहा है. इसके लिए गेट्स फाउंडेशन द्वारा महिलाओं को प्रबंधन कौशल में मजबूत बनाया जाएगा. मंगलवार को फाउंडेशन की मदद से बिहार एक्वा कल्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम और बिहार डेयरी ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट शुरू किया गया. इन योजनाओं का लक्ष्य आधुनिक तकनीक के जरिए उत्पादन बढ़ाना, किसानों और मछुआरों की आय में वृद्धि करना साथ ही जलवायु संवेदनशील और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है.

पशु संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता ने बताया कि उन्नत प्रजातियों, आधुनिक हैचरियों, बेहतर तालाब प्रबंधन और डिजिटल एक्वाकल्चर प्लेटफॉर्म से मछली उत्पादन में 25 प्रतिशत वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि तालाब उत्पादकता में 20 प्रतिशत सुधार का लक्ष्य तय किया गया है. इस काम में महिलाओं की कम से कम 60 प्रतिशत भागीदारी तय करते हुए महिला नेतृत्व वाले मछली के कामों को सरकार बढ़ावा देगी.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
दावा किया गया कि इन दोनों योजनाओं से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आय के अवसर सृजित होंगे, पोषण सुरक्षा मजबूत होगी और राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नया आयाम मिलेगा.

ये पहल बिहार को देश के अग्रणी कृषि और संबद्ध क्षेत्र वाले राज्यों की कतार में खड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

वहीं बिहार डेयरी ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट में चारा सुरक्षा, पशु प्रजनन, स्वच्छ दूध उत्पादन और मूल्य वर्धित डेयरी उत्पादों के विकास पर जोर दिया जाएगा.

सौर ऊर्जा आधारित हाइड्रोपोनिक चारा प्रणाली, साइलेज मॉडल और डिजिटल कृत्रिम गर्भाधान उपकरण जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा. इस परियोजना में भारतीय उद्योग परिसंघ तकनीकी सहयोग देगा.

एक्सपर्ट का कहना है कि मवेशी पालन में चारा देने, गोबर उठाने से लेकर सेवा करने के काम में महिलाओं की भूमिका अधिक रहती है.

इसके साथ मत्स्यपालन का 80 प्रतिशत काम महिलाएं ही करती हैं. अब उन्हें प्रशिक्षित कर उद्यमी बनाया जाएगा. इससे महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्तीकरण होगा.

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