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Meat: जानिए कम खर्चे में भैंस से कैसे लें क्वालिटी मीट

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. भारत सहित ऐसे बहुत से देश हैं जहां पर भैंस का पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है. खासकर ऐसे देश जहां पर चारे का कम संसाधन है या फिर गरीब देशों में भैंस पालकर किसान इसके मीट से अच्छी खासी आमदनी कमाते हैं. क्योंकि भैंस एक ऐसा पशु है जो कम खर्च में ज्यादा अच्छा मीट उत्पादन करता है. खासकर इसके मीट की दुनियाभर में डिमांड है. अरब कंट्रीज में भारत से बड़े पैमाने पर बफेलो मीट एक्सपार्ट किया जाता है. यहां तक की जिंदा पशु भी मांस के लिए एक्सपोर्ट होते हैं.

भैंसों को विशेष रूप से इटली, बुल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया, रूस और मिस्र जैसे देशों में मांस के लिए पाला जाता है. बफ़ेलो बीफ अपने करीबी सहयोगी, बीफ़ से भिन्न नामकरण है. कैराबीफ़ (शायद ही कभी बफ़ेन कहा जाता है) कैराबोआ शब्द से लिया गया है, जो थाईलैंड, फिलीपींस और कुछ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में दलदली भैंस का लोकप्रिय नाम है. बफेलो वील नर भैंस के बछड़ों का मांस को कहा जाता है.

मीट में होता है प्रोटीन: भैंसों में मोटे चारे, भूसे और फसल के अवशेषों का उपयोग करके उन्हें प्रोटीन युक्त मांस में परिवर्तित करने की क्षमता होती है. इसलिए भैंसें गरीब देशों में, जहां चारा संसाधन कम हैं, अच्छी तरह से फिट बैठती हैं. भैंस को एक मांस उत्पादक जानवर के रूप में उचित रूप से प्रबंधित और खिलाया जाता है और 16 से 20 महीने की उम्र में वध करने से मवेशियों की तुलना में बहुत कम लागत पर अत्यधिक संतोषजनक उच्च गुणवत्ता वाला मांस मिलता है. चूंकि भैंसों का उपयोग सदियों से वजन ढोने वाले पशुओं के रूप में किया जाता रहा है, इसलिए उनमें असाधारण मांसपेशियों का विकास हुआ है.

कम वक्त में अच्छा उत्पादन मिलता है: भैंस दुबले-पतले जानवर हैं. अन्य मवेशियों की तुलना में अधिक दुबला और कम मोटा होने के कारण, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग पैदा हो गई है. भैंसों में कई बीमारियों के खिलाफ मवेशियों की तुलना में उच्च स्तर की प्रतिरोधक क्षमता और सहनशीलता होती है. जब इनकी उम्र 15 वर्ष की होती है तो ये अच्छा उत्पादन देने में सक्षम हो जाते हैं. 18 वर्ष और उससे भी अधिक उम्र में बछड़े पैदा हो सकते हैं.

तेजी से बढ़ता है वजन: अन्य प्रजातियों की तुलना में भैंसों के शरीर का वजन उत्कृष्ट रूप से बढ़ता है. भैंस चराने की पोषक आवश्यकताओं में 0.24 किलोग्राम डीसीपी, 1.8 किलोग्राम टीडीएन, 6.6 एमसीएल एमई, 14 ग्राम सीए, और 11 ग्राम पी शामिल हैं. एडलिबिटम और उच्च सांद्रता (75:25) आधारित राशन पर फ़ीड के साथ विकास दर 610 ग्राम/दिन है. 7:1 की दक्षता. सभी रौगे राशन (हरी बरसीम/बरसीम घास) पर विकास दर 10:1 की फ़ीड दक्षता के साथ 370 ग्राम/दिन है.

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