नई दिल्ली. पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पशुओं में रोगों की पहचान करके इसके इलाज के लिए भी काम कर रही है. जिसके लिए एक केन्द्रीय प्रयोगशाला निदेशालय पर तथा 10 मंडलीय प्रयोगशालाएं अन्य मंडलों पर चल रही हैं. जिनके द्वारा पशु रोगों की जाचें और डायग्नोसिस की सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. साल 2004-05 में मंडलीय प्रयोगशाला वाराणसी और अयोध्या वर्ष 2005-06 में बरेली, मुरादाबाद तथा वर्ष 2006-07 में प्रयागराज एवं आगरा तथा वर्ष 2007-08 में मेरठ में प्रयोगशालाओं को सुदृढीकरण किया गया है.
वर्ष 2008-09 से वर्ष 2009-10 तक झांसी व कानपुर प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया गया है. वर्ष 2010-11 में अलीगढ़ में स्थापित स्वाइन फीवर प्रयोगशाला को मजबूत करने के लिए बजट जारी किया गया है. जिससे काम भी हो रहा है. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वित्त पोषण से प्रदेश के अन्य 65 जिलों के मुख्यालय पर एक-एक नए रोग निदान प्रयोगशाला की स्थापना की गई है.
पशु रोगों के नियंत्रण का कार्यक्रम
पशुपालन विभाग द्वारा 2017-18 से पशुओं के रोगों के नियंत्रण के लिए तमाम बीमारियों के वैक्सीनेशन का काम फ्री किया जा रहा है. पशु रोगों के नियंत्रण के लिए राज्यों को सहायता एस्कैड-60-प्रतिशत केन्द्र पोषित योजना के तहत समस्त सभी जिलों में गत वित्तीय वर्ष 2016-17 में रिवैलीडेशन की धनराशि के सापेक्ष प्रदेश के समस्त 75-जनपदों में एचएस रोग निरोधक टीकाकरण का कार्यक्रम अभियान के रूप में चलाया गया. साथ ही वित्तीय वर्ष 2017-18 में भारत सरकार के निर्देशानुसार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में अनुमोदित एचएस टीकाकरण कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश में सम्प्रति एच०एस० टीकाकरण कार्यक्रम लगातार चलाया जा रहा है.
बीमारियों को रोकने के लिए चल रही है एस्कैड योजना
पशु रोगों के नियंत्रण के लिए राज्यों को सहायता एस्कैड योजना के तहत पशुओं की तमाम रोगों से सुरक्षा के लिए पशुपालकों को जागरूक करने लिए भी कार्यक्रम और एक्सपर्ट, पैरावेटेनरी कार्मिकों को समय-समय पर जरूरी ट्रेनिंग भी दी जा रही है. पशु रोगों की रोकथाम के लिए नियंत्रण हेतु राज्यों को सहायता (एस्कैड) योजना तहत भारत सरकार के निर्देश के मुताबिक बारहवीं पंचवर्षीय योजना में, कुत्तों के काटने से पशुओं में होने वाले रैबीज रोग की रोकथाम हेतु रैबीज रोग निरोधक टीकाकरण एवं पशुओं को आंतरिक परजीवी से सुरक्षित रखने के लिए अभियान के रूप में दवापान की व्यवस्था किये जाने के लिये इंडो-पैरासिटिक कंट्रोल कार्यकम नामक दो नवीन कार्यक्रमों का प्रदेश के समस्त जनपदों में सत्त कियान्वयन किया जा रहा है.
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