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Fisheries: मछली पालक और मछुआरों को पहचान के साथ मिलेगा बाजार, NFDP की इस स्कीम से होगा मुनाफा

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मछुआरों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मत्स्य पालन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में एक अहम रोल निभाता है, जो लाखों लोगों को आजीविका और रोजगार देता है. साथ ही देश की पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण किरदार है. हालांकि, यह क्षेत्र काफी हद तक असंगठित है, जिसमें कई छोटे पैमाने के मछुआरे, किसान, विक्रेता और प्रोसेसिंग करने वालों की पहुंच राष्ट्रीय स्तर पर नहीं है. इसको देखते हुए राष्ट्रीय मत्स्य पालन डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (NFDP) ने भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को औपचारिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है. उसकी पहल से अब मछुआरों को पहचान के साथ-साथ बाजार भी मिलेगा. जिससे वो अच्छी कमाई कर सकेंगे.

NFDP और इसके मोबाइल ऐप को भारत में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्रों को औपचारिक बनाने के लिए एक बदलाव करने वाले उपकरण के तौर पर देखा जा रहा है. इसका उद्देश्य मछली उत्पादकों और संबंधित हितधारकों, जैसे कि मछली बेचेने वाले, प्रोसेसिंग करने वाले और छोटे व्यापारियों की एक व्यापक डिजिटल रजिस्ट्री बनाना है. रजिस्ट्रेशन और सेल्फ-रिपोर्टिंग के लिए एक सेंट्रलाइज्ड मंच देकर, मंच हितधारकों को कार्य-आधारित पहचान बनाने के लिए क्रेडिट सुविधा, जलीय कृषि बीमा प्रोत्साहन, प्रदर्शन अनुदान, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और वित्तीय मदद आदि करेगा.

वित्तीय मदद ​भी मिलेगी
डिजिटल प्लेटफॉर्म मार्केटिंग, ई-कॉमर्स और बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) मार्केटप्लेस तक पहुंच भी प्रदान करेगा. ये डीबीटी का समर्थन करेगा, सामाजिक सुरक्षा जाल के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण, ई-नीलामी, सामान्य सुविधाओं का प्रावधान, विस्तार सेवाएं और मत्स्य पालन से संबंधित जानकारी प्रदान करेगा. सिस्टम सही काम कर रहा है या नहीं इसको सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को शामिल करते हुए एक मजबूत वेरिफिकेशन मैकेनिज्म स्थापित किया जाएगा. एनएफडीपी पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए मछुआरों और अन्य हितधारकों को स्वयं या सहायता प्राप्त पंजीकरण के माध्यम से एनएफडीपी पर पंजीकृत होने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा.

सेल्फ रजिस्ट्रेशन के लिए चलेगा अभियान
कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और मत्स्य सहकारी समितियां जैसी एजेंसियां इन प्रयासों में जुटेंगी और सहायता करेंगी, और सेल्फ रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा देने के लिए एक अखिल भारतीय अभियान शुरू किया जाएगा. सीएससी और सहकारी समितियां राज्यों व संघ राज्य क्षेत्रों के मत्स्य विभाग के जिला व ब्लॉक स्तर के स्थानीय मत्स्य अधिकारियों की मदद से स्व-पंजीकरण और प्रासंगिक दस्तावेजों के इकट्ठा और सत्यापन सहित पंजीकरण कार्य करेंगी. वहीं संस्थागत वित्त तक पहुंच, सहकारी समितियों को FFPO के रूप में कार्य करने के लिए मजबूत करना, जलीय कृषि बीमा, प्रदर्शन अनुदान, पता लगाने की क्षमता, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण आदि भी इनके काम में होगा. मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य मंत्रालय द्वारा एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में राष्ट्रीय मत्स्य पालन डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (NFDP) एक मजबूत और सुलभ डिजिटल ढांचा बनाकर मत्स्य पालन क्षेत्र को बदल देगा.

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