Home मछली पालन Fisheries: मछली पालन के लिए क्यों अच्छा है बरसात का मौसम, जानें यहां
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Fisheries: मछली पालन के लिए क्यों अच्छा है बरसात का मौसम, जानें यहां

अगर आप छोटे गड्ढे में मछली पालन का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको तालाब के आकार को चुनना होगा. एक से 2000 स्क्वायर फीट के तालाब में आप बढ़िया मछली पालन कर सकते हैं.
तालाब में मछली.

नई दिल्ली. फिश फार्मिंग में जब मानसून आता है तो मछली पालन के लिए फायदा और नुकसान दोनों लेकर आता है. यह एक ऐसा मौसम है कि जिसमें मछलियां सबसे ज्यादा बीमार पड़ती हैं. हालांकि जहां नुकसान है तो वहीं फायदे भी कई हैं. उत्तर प्रदेश मछली पालन विभाग (Uttar Pradesh Fishery Department) की ओर से मानसून में मछली पालन में होने वाले फायदे के बारे में जानकारी दी गई है, आइए इस बारे में डिटेल से जानते हैं.

क्या फायदे हैं, जानें यहां
मानसून में तालाब के अंदर पानी की भरपूर उपलब्धता होती है. क्योंकि बारिश की वजह से तालाब पूरी तरह से भर जाता है.

इससे बार-बार तालाब में पानी डालने की जरूरत नहीं पड़ती है. जिससे आपका बिजली का खर्चा बचता है और फायदा मछली पालन के काम में मिलता है.

बारिश का पानी साफ सुथरा होता है और यह तालाब की ताजगी को बनाए रखने में मददगार साबित होता है.

वहीं बारिश का पानी जब खेतों जंगलों में पहाड़ों से होकर तालाब पर पहुंचता है तो इसका एक फायदा यह होता है कि नेचुरल फीड तैयार होता है. जिससे मछलियों के लिए फायदा मिलता है.

मछलियों को इससे तमाम मिनरल्स मिल जाते हैं. जिससे दवाइयों का खर्च कम हो जाता है और यह खनिज पानी और मिट्टी दोनों को संतुलित बनाते हैं. जिससे प्रोडक्शन बेहतर होता है.

मानसून के दौरान तापमान सामान्य रहता है. ज्यादा गर्मी रहती है ना ज्यादा ठंड रहती है. यह संतुलन मछलियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है.

वहीं नए बीज डालने का सबसे सही समय यही होता है. यह समय मछलियों के बच्चों को तलाक छोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है.

इस दौरान पानी की मात्रा सही रहती है. तापमान स्थित रहता है. वहीं तालाब का ईको सिस्टम बीज के लिए सबसे सही होता है.

मानसून का मौसम तालाब के लिए बेहतरीन होता है. क्योंकि इस दौरान प्राकृतिक भोजन भी तैयार हो जाता है.

जब बारिश का पानी तालाब में गिरता है तो बहुत से सूक्ष्मजीव पैदा होते हैं जैसे प्लावन और छोटे कीड़े मकोड़े जो मछलियों के लिए अच्छे आहार साबित होते हैं.

Written by
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