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Animal Fodder: यूपी में पशुपालकों को अब अच्छे हरे चारे की नहीं होगी कमी, NDDB को मिली जिम्मेदारी

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. पशुओं के लिए हरा चारा जरूरी होता है और अच्छे हरे चारे की कमी भी है. ऐसे में उत्तर प्रदेश में एक अहम कदम उठाया गया है. सीएम योगी ने दावा किया है कि प्रदेश में इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे राज्य में पशुपालकों को अब अच्छे हरे चारे की कमी नहीं होगी. दरअसल, एनडीडीबी ने यूपी सरकार के साथ मिलकर एमओयू (OMU) साइन किया है और तीन डेयरी (Dairy) (गोरखपुर, कानपुर, कन्नौज) को अपने अधीन ले लिया है. अंबेडकर नगर के चारा उत्पादन केंद्र को भी एनडीडीबी को दिया गया है. इससे पशुपालकों को अच्छा चारा उपलब्ध कराने में वे मदद करेंगे.

वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में केमिकल, पेस्टिसाइड, फर्टिलाइजर का ज्यादा इस्तेमाल नई बीमाारियों को जन्म दे रहा है. कैंसर, खराब किडनी, लीवर के खतरनाक परिणाम बताते हैं कि केमिकल, पेस्टिसाइड व फर्टिलाइजर का उपयोग अत्यधिक मात्रा में किया है. हमें इस समस्या के समाधान का रास्ता निकालना होगा. प्राकृतिक जीवन जीने के लिए प्राकृतिक खेती महत्वपूर्ण है. प्राकृतिक खेती गो आधारित खेती ही है, भारतीय नस्ल का गोवंश उसमें बड़ी भूमिका का निर्वहन कर सकता है.

27 जिलों के लिए क्या है यूपी सरकार का प्लान
गौरतलब है कि 27 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है. सीएम ने कहा कि 27 जिलों में हम लोगों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का विशेष अभियान चलाया है. इससे अच्छे हरे चारे की कमी को दूर किया जा सकता है. इसके लिए बुंदेलखंड के सातों जिलों में प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने का काम चल रहा है. गो आधारित खेती के महत्व को बढ़ाने की दिशा में भी काम शुरू किया गया है. यह किसानों की आमदनी को बढ़ाने में योगदान देंगे. इससे किसान की आमदनी-समृद्धि बढ़ेगी तो देश समृद्धि के नए सोपान को हासिल करेगा. आत्मनिर्भर व विकसित भारत के संकल्पों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

गायों की नस्ल सुधार के लिए सीएम ने क्या कहा
मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि यूपी में गोसेवा आयोग को जिम्मेदारी दी है कि गोआश्रय स्थल की व्यवस्था ठीक हो. नस्ल सुधार के लिए अभियान चले और वे सुनिश्चित करें कि गोवंश के नस्ल सुधार कार्यक्रम को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को प्रशिक्षित भी कर सकें. निराश्रित गोआश्रय स्थलों को नेचुरल फॉर्मिंग से भी जोड़ सकें.

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