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Cow Dung: गाय के गोबर से बना पेंट है बेहद किफायती, इस नेचुरल पेंट में है कई क्वालिटी

ब्रुसेलोसिस ब्रुसेला बैक्टीरिया के कारण होता है जो मुख्य रूप से पशुधन (जैसे गाय, भेड़, बकरी) में पाए जाते हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. क्या आपने कभी गाय के गोबर से बने पेंट के बारे में सुना है. जी हां, अब गाय के गोबर से बने पेंट भी बनने लगे हैं. यह पर्यावरण के लिए बिल्कुल अनुकूल हैं. इस पेंट में एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल क्वालिटी भी मौजूद है. जिस वजह से न सिर्फ केमिकल वाले पेंट के मुकाबले यह ज्यादा सेफ माना जा रहा है. बल्कि घर को ठंडा करने में मददगार है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गोबर से बनने वाले प्राकृतिक पेंट में नॉन टॉक्सिक और गंधहीन है. उन्नाव के नवाबगंज में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत महिलाओं ने न सिर्फ गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने का काम कर रही है. बल्कि बहुत उपयोगी सामान बनाकर आत्मनिर्भर बन रही है.

गाय का दूध ही नहीं गोबर भी उपयोगी है. यह बात हम सभी जानते हैं. इस गोबर में कई ऐसी शक्तियां छुपी हैं. जिनके को आज वैज्ञानिक भी मान रहे हैं. अब इसी गाय के गोबर में से प्राकृतिक पेंट बनाने का काम उन्नाव के नवाबगंज में हो रहा है. ब्लॉक मिशन मैनेजर अरविंद कुमार सोनी कहते हैं कि गोबर से बनने वाला यह पेंट प्राकृतिक प्रिंट के ब्रांड के नाम से बेचा जाता है. यह प्राकृतिक पेंट बाजार में बिकने वाले केमिकल वाले पेंट के अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल है.

घर को ठंडा रखता है पेंट
बाजार में जो पेंट बिक रहा है, उसमें टॉक्सिक होता है. यहां तक की इसमें स्मेल भी आती है. जबकि प्राकृतिक पेंट में नॉन टैक्सिक्स है. इसमें कोई स्मेल नहीं होती है. वहीं इसमें एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल क्वालिटी होती है. इस पेंट को अंदर और बाहर दीवारों पर लगा सकते हैं. डिस्टेंपर और इमल्शन पेंट के मुकाबले या घर को ठंडा करने में भी मदद करता है. इस पेंट में शीशा, क्रोमियम और आर्सेनिक कैडमियम जैसी कोई भी धातु नहीं मिलाई गई है. बाजार के पेंट के मुकाबले कम दाम पर बिक रहा है.

महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर
इस पेंट की कीमत भी काफी कम रखी गई है. जिससे आने वाले दिन में इसकी मांग बढ़ा सकती है. राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत उन्नाव के नवाबगंज में गोबर से पेंट बनाने का एक पलांट स्थापित किया गया है. इसका संचालन महिलाएं कर रही हैं. यहां काम करने वाले महिला मिथिलेश ने बताया कि पेंट बनाने की वजह से यहां की महिलाओं को न सिर्फ पहचान मिली बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिली है. पेंट बनाने में समूह की 6 से ज्यादा ज्यादा महिलाओं को रोजगार मिला है. यहां से महिलाओं को 5000 रुपये तक महीने की कमाई हो रही है.

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