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Animal Husbandry Tips: एफएमडी से बचाने के लिए पशु के खुरों को फिनाइल के पानी से धोएं

ब्रुसेलोसिस ब्रुसेला बैक्टीरिया के कारण होता है जो मुख्य रूप से पशुधन (जैसे गाय, भेड़, बकरी) में पाए जाते हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) बेहद ही खतरनाक बीमारी में से एक है. इस बीमारीसे पशुओं को बहुत दिक्कतें होती हैं. पशु को ये बीमारी न हो और पशुपालकों को इससे नुकसान न हो, इसके लिए बिहार के खगड़िया जिले के चौथम प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित पशु अस्पताल में सोमवार को खुरपका एवं मुंहपका (एफएमडी) टीकाकरण अभियान के सातवें चरण का शुभारंभ किया गया है. इसकी शुरुआत पशु चिकित्सक डा. मनीष कुमार ने किया. इस दौरान कुछ अहम जानकारी दी गई. जिससे पशुपालक अपने पशुओं को इस बीमारी से बचा सकते हैं.

भ्रमणशील चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार सिंह ने अभियान की शुरुआत करते हुए बताया कि पशुपालन विभाग एवं जिला प्रशासन के निर्देश पर प्रखंड की सभी 13 पंचायतों में 8 अगस्त तक टीकाकरण किया जाएगा.

खतरनाक और तेजी से फैलने वाली वायरस बीमारी
उन्होंने कहा कि खुरपका-मुंहपका रोग गाय, भैंस जैसे खुर वाले पशुओं में होने वाली एक खतरनाक और तेजी से फैलने वाली वायरस बीमारी है.

इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, मुंह में छाले, बहुत ज्यादा लार बहना, और खुरों में घाव के कारण लंगड़ाकर चलना शामिल है.

इस संबंध में डा. मनीष कुमार ने कहा कि इस बीमारी में पशु का खाना-पीना बंद हो जाता है.

इसके लक्षण में मुंह से झागदार लार का टपकना, जीभ और होठों पर फफोले या छाले होना, खुरों के बीच मुंह में छाले, बहुत ज्यादा लार बहना मुख्य लक्षण हैं.

इसके अलावा घाव होना और उनमें कीड़े पड़ना आदि भी इसके लक्षणों में शामिल है. इस रोग से ग्रसित दूध देने वाले पशुओं के दूध में भारी कमी आ जाती है.

उन्होंने कहा कि इस बीमारी से बचाव के लिए पशु के खुरों को पोटेशियम परमैगनेट या फिनाइल के पानी से साफ करें. मुंह के छालों को फिटकरी के पानी से धोएं.

खुर के घावों पर मक्खियों को दूर रखने वाली एंटीसेप्टिक मरहम लगाएं. इससे काफी हद तक बचाव किया जा सकता है.

पशु चिकित्सक ने कहा कि बीमार पशु को केवल मुलायम और पचने योग्य खाना दें.

बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग कर दें और उनके बर्तन आदि अलग रखें.

निष्कर्ष
यदि बताई गई बातों पर आप अमल करते हैं तो फिर पशुपालन में खुद को नुकसान से बचा पाएंगे. क्योंकि एफएमडी बेहद ही खतरनाक है. इसलिए इससे बचाव करने पर ही पशुपालन में फायदा हो पाएगा.

Written by
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