Home पशुपालन Silage: चारे की लागत को घटा देता है साइलेज, कमी को भी करता है पूरी
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Silage: चारे की लागत को घटा देता है साइलेज, कमी को भी करता है पूरी

अच्छा साइलेज बनाने के लिए यह जरूरी है, कि फसल का चुनाव अच्छी प्रकार से किया जाए.
साइलेज का प्रतीकात्मक फोटो।

नई दिल्ली. पशुपालन में साइलेज बेहद ही जरूरी होता है. क्योंकि जब हरे चारे की कमी होती है तो यही साइलेज ही हरे चारे में मौजूद तमाम पोषक तत्वों की पूर्ति करता है. हरे चारे को बिना हवा (ऑक्सीजन) के नियंत्रित किण्वन (Anaerobic Fermentation) द्वारा कई महीनों तक सुरक्षित रखने की बैज्ञानिक विधि तैयार सामग्री को ही साइलेज कहा जाता है. एक्सपर्ट के मुताबिक साइलेज बनाने के लिए मक्का सबसे उपयुक्त फसल मानी जाती है. वहीं बाजरा, ज्वार, नेपियर घास और उचित मिश्रण के साथ ओट्स से भी साइलेज को तैयार किया जा सकता है.

साइलेज के फायदों की बात की जाए तो इससे पूरे वर्ष पौष्टिक चारा उपलब्ध रहता है. सूखे, गर्मी और चारे की कमी के समय उपयोगी होता है. चारे की बर्बादी कम होती है. दुधारू पशुओं के संतुलित पोषण में सहायक होता है. उचित आहार प्रबंधन के साथ दूध उत्पादन बनाए रखने में मदद करता है.

साइलेज कैसे बनता है
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया से चारे में pH कम हो जाता है और चारा सुरक्षित रहता है. घुलनशील शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदल देते हैं.

अच्छे साइलेज की पहचान की बात करें तो हल्का हरा से सुनहरा भूरा रंग,
खट्टी लेकिन सुखद गंध (लैक्टिक अम्ल जैसी) होती है.

फफूंदी या सड़न नहीं होनी चाहिए. वहीं ये बहुत अधिक गीला या चिपचिपा नहीं होना चाहिए.

साइलेज बनाते समय चारे में लगभग 30-35 फीसद शुष्क पदार्थ (Dry Matter) होना चाहिए.

चारे को अच्छी तरह दबाकर पूरी पूरी तरह हवा-रहित (Air-tight) रखना आवश्यक है.

फफूंदी लगा या सड़ा हुआ साइलेज पशुओं को कभी न खिलाएं.

साइलेज के लिए फसल को सही अवस्था (दाना दूधिया से आटे की अवस्था) में काटें.

2 से 3 सेमी लंबाई में काटकर तेजी से भरें.

परत-दर-परत भरते जाएं और अच्छी तरह दवाएं.

हवा न जाने दें, प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढकें.

सही साइलेज स्वस्थ पशु के लिए जरूरी है. इससे अधिक दूध उत्पादन मिलेगा.

बेहतर प्रजनन क्षमता होगी. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होगी.

चारे की लागत में कमी होगी.

संतुलित आहार के साथ साइलेज, दाना और खनिज मिश्रण जरूर दें.

याद रखें जब साइलेज बनाएं तो शीट के किनारों को मि‌ट्टी या रेत से अच्छी तरह दवाएं.

कम से कम 45-60 दिन बाद साइलेज उपयोग के लिए तैयार हो जाता है.

दिन में 2-3 बार साइलेज खिलाएं और हमेशा साफ पानी उपलब्ध रखें.

निष्कर्ष
अपने क्षेत्र की फसल, जलवायु और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार उचित तकनीकी सलाह अवश्य लें. इससे साइलेज बनाने में आसानी होगी.

Written by
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