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Government Scheme: मंगला पशु बीमा योजना का फायदा उठाकर पशुपालक खुद को नुकसान से बचाएं

सीता नगर के पास 515 एकड़ जमीन में यह बड़ी गौशाला बनाई जा रही है. यहां बीस हजार गायों को रखने की व्यवस्था होगी. निराश्रित गोवंश की समस्या सभी जिलों में है इसको दूर करने के प्रयास किया जा रहे हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पशुपालन में हाथ आजमाने वाले ऐसे बहुत से लोग हैं, जो इस काम को छोड़ चुके हैं. असल में कई बार ऐसा होता है कि पशुपालक पशुपालन करता है लेकिन किसी वजह से पशु की मौत होने पर उसे बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ जाता है. जिससे पशुपालन का काम औंधे मुंह गिर जाता है. पशुपालक भी कर्जदार हो जाता है. जबकि एक्सपर्ट का कहना है कि पशुपालन को सही तरह से किया जाए तो इसकी नौबत नहीं आती है. हालांकि बावजूद इसके सरकारें पशुपालन में बीमा योजना जैसी स्कीम से पशुपालकों को नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करती हैं.

बता दें कि राजस्थान में मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना चल रही है. जिसके जरिए पशुपालकों को किसी भी विपरीत परिस्थिति में मदद दी जाती है. ऐसे में पशुपालकों को इस योजना की जानकारी जरूर होना चाहिए. क्योंकि जब पशुओं का बीमा होगा तो आर्थिक सुरक्षा कवच मिलेगा.

मंगला पशु बीमा योजना की मुख्य बातें, यहां जानें
राज्य सरकार द्वारा पशुओं का बीमा किया जाता है.

अगर पशु की मृत्यु (बीमारी या फिर दुर्घटना) से हो जाए तो नुकसान सरकार देती है.

इस योजना से पशुपालक को आर्थिक नुकसान से बचाव मिलता है.

गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट आदि सभी घरेलू पशु इस योजना में शामिल हैं.

पशु की मृत्यु या फिर दुर्घटना पर 40 हजार रुपए प्रति पशु (अधिकतम छह पशु) तक सहायता राशि दी जाती है.

पशुओं की श्रेणी और बीमा सीमा में गाय, भैंस अधिकतम 2 दुधारू पशु या 1 गाय और 1 भैंस पर योजना का फायदा मिलता है.

भेड़ या बकरी की बात की जाए अधिकतम 10 भेड़ या 10 बकरी पर योजना का फायदा उठाया जा सकता है.

ऊंट (उष्ट्र वंश) पर योजना के तहत अधिकतम 1 ऊंट पर फायदा मिलता है.

आवेदन प्रक्रिया की बात करें तो मंगला पशु बीमा सेवाओं के सामान्य पोर्टल / संरक्षान पर ऑनलाइन आवेदन करें.

आवेदन में जरूरी दस्तावेज, आधार कार्ड, पशु का कान टैग, पहचान पत्र, बैंक पासबुक, जमीन, खलतास संबंधी जानकारी देनी होगी.

सभी पशुपालकों के लिए ये योजना है. जिसके तहत पशुओं की मौत पर आर्थिक सहायता मिलती है.

इस योजना से पशुधन को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है. गो पालन, डेयरी व पशुपालन को बढ़ावा मिलता है.

योजना की खासियत की बात की जाए तो इससे सामाजिक सुरक्षा की मजबूत पहचान बनती है.

सरकार की ओर से समय पर सहायता मिल जाने से पशुपालकों के लिए बड़ी राहत मिलती है.

Written by
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