Home पशुपालन Pashu Mela: गडवासु में 18-19 सितंबर दो दिवसीय पशु पालन मेला लगेगा, पशुपालन का मिलेगा ज्ञान
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Pashu Mela: गडवासु में 18-19 सितंबर दो दिवसीय पशु पालन मेला लगेगा, पशुपालन का मिलेगा ज्ञान

पशु मेले की तैयारी जोरों पर है.

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना, 18 और 19 सितंबर को बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय पशु पालन मेले की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है. वाइस-चांसलर डॉ. जतिंदर पॉल सिंह गिल ने कहा कि यह मेला पशुपालकों और उद्योग से जुड़े लोगों के लिए ज्ञान साझा करने का एक प्रमुख कार्यक्रम बन गया है. मेले की थीम पर प्रकाश डालते हुए डॉ. गिल ने कहा कि बायोसिक्योरिटी (जैव-सुरक्षा) के महत्व के बारे में जागरूकता प्रदान करने पर विशेष जोर दिया जाएगा और मेले की थीम “बायोसिक्योरिटी को मजबूत करें. पशु रोगों को रोकें” है, ताकि पशुपालकों को बायोसिक्योरिटी उपायों के बारे में जानकारी दी जा सके.

कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए, एक्सटेंशन एजुकेशन के निदेशक डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि बड़ी संख्या में आ रही पूछताछ से पंजाब और पड़ोसी राज्यों के किसानों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया स्पष्ट है. यह मेला एक अनूठा मंच होगा जहां किसान सीधे विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के साथ बातचीत कर सकते हैं और पशुपालन, मत्स्य पालन और पोल्ट्री फार्मिंग में नवीनतम तकनीकों और नवाचारों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

खनिज पूरक तैयार करने की मिलेगी जानकारी
▶️ दो दिनों तक वैज्ञानिक पशु प्रबंधन, लाभदायक डेयरी फार्मिंग, मछली पालन और पोल्ट्री फार्मिंग पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे.

▶️ जिससे किसानों को उत्पादकता और आय में सुधार के लिए आधुनिक तरीकों को अपनाने में मदद मिलेगी.

▶️ इंटरैक्टिव प्रश्न-उत्तर सत्र भी किसानों को अपनी फील्ड की समस्याओं का समाधान खोजने के अवसर प्रदान करेंगे.

▶️ मेले के मुख्य आकर्षणों में से एक विश्वविद्यालय द्वारा पाले गए उच्च गुणवत्ता वाले मवेशियों, भैंसों, बकरियों और पोल्ट्री पक्षियों का प्रदर्शन होगा.

▶️ ये बेहतर जानवर गुणवत्तापूर्ण प्रजनन के लाभों को प्रदर्शित करेंगे और किसानों को बेहतर जर्मप्लाज्म के साथ अपने पशुधन को अपग्रेड करने के लिए प्रेरित करेंगे.

▶️ मेहमानों को डेयरी, बकरी, सुअर, मछली और पोल्ट्री फार्मिंग, पशुपालन के लिए ‘पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज’ और विश्वविद्यालय की लोकप्रिय पत्रिका ‘वैज्ञानिक पशु पालन’ पर उपयोगी प्रकाशन भी उपलब्ध होंगे.

▶️ डॉ. ग्रेवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उत्पाद जैसे क्षेत्र-विशिष्ट खनिज मिश्रण, यूरोमिन लिक और बाईपास फैट नाममात्र कीमतों पर उपलब्ध होंगे.

▶️ किसानों के लाभ के लिए गेहूं और धान के भूसे के यूरिया उपचार, खनिज पूरक तैयार करने, टीट डिप के उपयोग और एकारिसाइड्स के प्रयोग पर लाइव प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे.

▶️ मैस्टाइटिस, अंदरूनी परजीवियों, दूध और चारे के सैंपल, और चारे में नाइट्रेट की विषाक्तता की जांच की मुफ्त सुविधा भी दी जाएगी.

▶️ किसान बीमारी का पता लगाने के लिए खून, गोबर, पेशाब और त्वचा के सैंपल ला सकते हैं. जानवरों और इंसानों, दोनों के लिए ब्रुसेलोसिस की जांच की सुविधा होगी.

▶️ साथ ही, यूनिवर्सिटी की बनाई दूध जांच किट भी बिक्री के लिए उपलब्ध होगी, जो पांच आम मिलावटी चीज़ों—चीनी, स्टार्च, यूरिया, न्यूट्रलाइजर और हाइड्रोजन पेरोक्साइड-का पता लगा सकती है.

▶️ पशुपालन से जुड़ी 100 से ज़्यादा कंपनियां-जिनमें दवाएं, पशु आहार, वीर्य उत्पादन, मशीनरी, उपकरण, चारे के बीज और फीड सप्लीमेंट का काम करने वाली कंपनियां शामिल हैं. एग्ज़िबिशन स्टॉल के ज़रिए हिस्सा लेंगी.

▶️ यूनिवर्सिटी पशुपालन, पोल्ट्री फार्मिंग और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की कैटेगरी में प्रगतिशील किसानों को प्रतिष्ठित ‘मुख्यमंत्री पुरस्कार’ भी देगी.

Written by
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