नई दिल्ली. देश में सबसे ज्यादा चिकन मीट का उत्पादन होता है और उत्पादन के लिए ब्रॉयलर मुर्गों को पाला जाता है. बता दें कि पोल्ट्री फीड में आने वाली लागत सबसे ज्यादा फीड पर होती है. जबकि फीड लगातार महंगा होता जा रहा है. इससे पोल्ट्री सेक्टर पर प्रेशर बढ़ा है और उत्पादन में कमी करने की बात सामने आ रही है. जिससे आने वाले समय में बाजार में चिकन का रेट भी उछाल ले सकता है. क्योंकि जब उत्पादन कम होता है, दाम भी बढ़ जाते हैं. वहीं पोल्ट्री जुड़े लोगों पर इसका असर जरूर दिखाई देता है.
आपको बता दें कि पिछले 1 महीने के दौरान सोयाबीन की खली की कीमतों में 40 फीसद से ज्यादा इजाफा देखने को मिला है. वहीं फीड को बनाने के लिए इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है. एक्सपर्ट कह रहे हैं कि जब 40 फीसद तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है तो लागत बढ़ने से देश भर के पोल्ट्री उत्पादकों पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
कब की जाएगी कमी
इसी बोझ के चलते उत्पादन को बनाए रखना किसी भी पोल्ट्री फार्मर के लिए इतना आसान नहीं होता है.
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो आने वाले समय में जब जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के दौरान कई त्यौहार होंगे तो उत्पादन में कमी की जा सकती है.
ऐसे भी इस दौरान कई हिंदू पर्व आयोजित होते हैं और लोग खासकर सावन और दुर्गा पूजा जैसे त्योहार में मांसाहारी व्यंजनों से दूरी बना लेते हैं.
एक्सपर्ट कहते हैं कि पारंपरिक तौर पर चिकन खरीदारों की भीड़ दुकानों पर काम नजर आती है.
जिसके चलते चिकन उद्योग पर भी असर आता है. एक्सपर्ट कह रहे हैं उत्पादन में कमी से फार्मर्स को फायदा होगा.
इसलिए इस दरमियान फीसद तक उत्पादन में कटौती अगर होती है तो उसका बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा.
पोल्ट्री जगत से जुड़े एक्सपर्ट कहते हैं कि ऐसा करने से बाजार संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है और बढ़ती लागत भी कम की जा सकती है.
आपको बता दें कि सोयाबीन की खली की उत्पादन कम नहीं हो रहा है. बावजूद इसके इसकी कीमतों में बढ़ोतरी ने पोल्ट्री फार्मर के माथे पर पसीना ला दिया है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट दावा कर रहे हैं कि ऐसा जमाखोरी आदि की वजह से हो रहा है. जिससे पोल्ट्री फार्मर्स को नुकसान भी हो रहा है.











