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Poultry Farming: गर्म और ठंडे दोनों क्षेत्रों के लिए इन नस्लों की मुर्गियां पालें होगा तगड़ा मुनाफा, पढ़ें डिटेल

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पोल्ट्री फॉर्म में मौजूद मुर्गे—मर्गियां. live stock animal news

नई दिल्ली. जिन इलाकों में गर्मी और ह्यूमिडिटी ज्यादा होता है और जहां पर ठंड ज्यादा है. वहां सभी तरह की मुर्गियों को खुद को ढाल पाना मुश्किल हो जाता है. हालांकि ऐसी दो नस्लें हैं, जिन्होंने इन क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन किया है. आंकड़ों के मुताबिक पुर्वोत्तर प्रदेश असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, मिज़ोरम एवम् सिक्किम जहां के वातावरण में काफी फर्क है वहां भी करीब 1.7 लाख उर्वरक अंडे, 50 हज़ार चूजे एवं 11 हज़ार पैतृक चूज़ों की आपूर्ति की गयी और किसानों ने यहां मुर्गियां पाली तो नतीजे बेहतर मिले. वहीं जम्मू में वनराज ने अच्छा उतपादन किया.

इन क्षेत्रों में वनराजा का छह सप्ताह एवम् परिपक्व शारीरिक वज़न 700-800 एवम् 2000-2200 ग्राम था. वार्षिक अंडे देने की क्षमता 140-150 पायी गयी. ग्रामप्रिया एक अधिक अंडे देने वाली नस्ल हैं. जिसने पुर्वोत्तर राज्यों में 500 दिन में 170-200 अंडे दिये. बताते चलें कि डीपीआर द्वारा विकसित कुक्कुट नस्ल, विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्र में भी अपनी उत्पादकता बनाए रखने और हर जलवायु क्षेत्र में सहज रूप से ढल जाने के कारण देश के प्रत्येक भाग में इसे किसानों द्वारा अपनाया गया है.

गर्म क्षेत्र के लिए बेहतर हैं ये नस्लें
भारत के एक मध्य एवम् दक्षिणी राज्यों की जलवायु आमतौर पर गर्म एवम् आर्द्रता वाली होती है. इन राज्यों में करीब 7.5 लाख एक दिन के चूजे एवम् 6.2 लाख उर्वरक अंडे किसानों को विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों, पशुपालन विभार्गो एवम् गैर सरकारी संस्थानों द्वारा बांटे गए. इन परिस्थितियों में भी वनराजा एवम् ग्रामप्रिया नस्ल ने बेहतरीन उत्पादन किया. एक शोध जो कि तेलंगाना के ज़हीराबाद जिले में किया गया, उसमे पाया गया कि वनराजा के 25 सप्ताह के मुर्गा एवम् मुर्गी का शरीर वज़न भार क्रमशः 3.75 एवम् 2.67 कि.ग्रा. था. इससे पता चलता है कि वनराजा एवम् ग्रामप्रिया नस्ल इस जलवायु क्षेत्र के लिए उपयुक्त बताया गया.

ठंडे मौसम में उत्पादन क्षमता रही अच्छी
वनराजा एवम् ग्रामप्रिया नस्ल भीषण शीतल जलवायु क्षेत्र में भी साधारण रूप से ढल जाते हैं. एक शोध जिसमें इन नस्लों को पहले शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय के प्रांगण में 6 सप्ताह तक पाला गया, उसके बाद कृषि विज्ञान केंद्र बड्‌गाम, मलांग्पोरा एवम् पोम्बय और कुक्कुट विकास संस्थान द्वारा अनंतनाग, कुपवाड़ा क्षेत्र के किसानों को वितरित किया गया. इन क्षेत्रों का तापमान जहाँ -20° से. तक चला जाता है, वहां भी ये नस्ल पूरी तरह अनुकूलित हो गए. वनराजा मुर्गे का 8, 10, 16 24 एवम् 30 सप्ताह में औसत शरीर वज़न भार क्रमशः 840, 920, 1719, 1908 एवम् 3248 ग्राम था. इसी तरह मुर्गी का शरीर वज़न भार 702, 1337, 1502 एवम् 2642 ग्रा. था। मृत्यु दर मात्र 4.7-14.6% व प्रथम् अंडा देने की आयु 178-180 दिन थी.

Written by
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