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Fish Farming: एक्वाकल्चर में प्रोडक्शन बढ़ाने और लागत को कम करने का तरीका पढ़ें यहां

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
तालाब में पाली गई मछली की तस्वीर.

नई दिल्ली. एक्वाकल्चर में उत्पादन लागत को कम करने और एक्वाकल्च के लिए स्थिरता प्राप्त करने के लिए फीड क्षमता में सुधार करना महत्वपूर्ण है. फीड की क्षमता में सुधार का मतलब है कि प्रति किलोग्राम फीड की खपत को कम करना, या फीड की समान मात्रा से मछली उत्पादन में ग्रोथ करना. आहार क्षमता विभिन्न प्रजतियों में अलग-अलग होती है. आहार की क्षमता पालन-पोषण की पर्यावरणीय स्थिति, तापमान, लवणता (Salinity), पीएच और फीड संरचना जैसे कारकों पर निर्भर करता है. आहार की क्षमता बढ़ाने से मछली स्वस्थ रहती है और उसका विकास तेजी से होता है. साथ ही साथ किसानों की आय में भी ग्रोथ होती है.

एक्सपर्ट कहते हैं कि बहुत सारी तकनीकों को अपना कर मछलियों की आहार की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है. जैसे की एंजाइम सोर्स को आहार में मिलाकर, फर्मेंटेशन प्रक्रिया द्वारा, एडिटिव और हॉर्मोन को आहार में मिलाकर भी ऐसा किया जा सकता है.

अच्छी होनी चाहिए फीड की क्वालिटी
कई पर्यावरणीय कारक मछलियों में भोजन की खपत को प्रभावित करते हैं. मछलियों में आहार की खपत भौतिक, रासायनिक या जैविक पर्यावरणीय कारको पर निर्भर करता है. फीड की खपत को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में तापमान, पीएच, प्रबंधन के तरीके, फीड या आहार की गुणवत्ता, अनुवांशिक कारक, शारीरिक स्थिति इत्यादि शामिल हैं. आहार की क्षमता मुख्य रूप से उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करता है. विभिन्न तकनीकों द्वारा फीड की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है.

मत्स्य आहार की क्षमता बढ़ाना क्यों है जरूरी
फिश फीड आहार लागत मछली उत्पादन के कुल उत्पादन लागत का 50-60 फीसदी या उससे अधिक होती है. मछली उत्पादन के लिए कम आहार का इस्तेमाल कर मछली उत्पादन के फायदे में काफी सुधार करना और पर्यावरणीय प्रभाव को भी कम करना है. भविष्य में फीड सामग्री को लंबे समय तक बनाए रखना. मछली पालन के लिए महत्वपूर्ण है.

आहार में प्रोबायोटिक्स को सम्मिलित कर
आहार में प्रोबायोटिक्स मिलाने से फीड का पाचन तथा अवशोषण दोनों बढ़ जाता है. क्योंकि प्रोबायोटिक्स पाचन करने वाले रसायनों का उत्पादन बढ़ाता है, जैसे की एमाइलेज, प्रोटीएज और लाइपेज. मौजूदा वक्त में विभिन्न जीवाणु प्रजातियों जैसे बैसिलस, लैक्टोबैसिलस, एंटरोकोकस, कार्नबिक्टीरियम प्रजाति और यीस्ट सैक्रोमाइसेस सेरेविसि आदि का उपयोग प्रोबाओटिक्स के रूप में किया जाता है.

इस तरह तैयार करें आहार
एंटी न्यूट्रिशनल कारक को कम कर या हटा कर आहार या फीड सामग्री में कुछ पोषण विरोधी कारक मौजूद होते हैं, जो आहार ग्रहण करने तथा उसकी क्षमता को कम करता है. हम आहार बनाने के लिए जिस आहार सामग्री का चुनाव करते हैं यदि हम उसमें मौजूद एंटी न्यूट्रिशनल कारकों को पता करके उसको कम कर या हटा कर आहार बनाये तो आहार की उपयोगिता या आहार की क्षमता मछलियों में बढ़ जाती हैं.

Written by
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