Home पशुपालन Animal Disease: किन वजहों से होता है थनैला रोग, इंफेक्शन की शुरुआत कैसे होती है, जानें यहां
पशुपालन

Animal Disease: किन वजहों से होता है थनैला रोग, इंफेक्शन की शुरुआत कैसे होती है, जानें यहां

दुधारू पशुओं के बयाने के संकेत में सामान्यतया गर्भनाल या जेर का निष्कासन ब्याने के तीन से 8 घंटे बाद हो जाता है.
गाय-भैंस की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. दुधारू पशुओं में थनेला (Mastitis) एक संक्रामक रोग है. इस बीमारी से थन व गादी गर्म, सख्त हो जाती है. वहीं दर्द भी होता है. दूध में खून के कतरे आने लगते हैं, दूध पतला हो जाता है. एवं दूध के रंग में भी बदलाव आ जाता है. कुछ दिनों बाद फाइब्रोसिस के कारण थन कठोर हो जाता है. वहीं दूध बनाने वाली ग्रंथियां फाइब्रोसिस के कारण दूध का बनाना बंद कर देती है. इस तरह से थन आखिर में बंद हो जाते हैं. यह रोग मुख्य रुप से गाय, भैंस एवं बकरी में होता है.

थनैला रोग को निम्न रूप में वर्गीकृत किया जाता है
सब क्लीनिकल मैस्टाइटिस इस स्थिति में पशु संक्रमित होता है. पर लक्षण दिखाई नहीं देते हैं. हालांकि अच्छा खिलाने के बाद भी दुग्ध उत्पादन धीरे-धीरे गिरता चला जाता है. एक्यूट मैस्टाइटिस इस स्थिति में पशु के अयन में सूजन आ जाती है. कभी-कभी दूध के साथ रक्त का थक्का भी निकलता है, अयन गर्म महसूस होता है, पशु के शरीर का तापमान बढ जाता है अंत में खाना-पीना बंद कर देता है. क्रोनिक मैस्टाइटिस यहां अयन से दूध की बजाय पानी या दही जैसा दूध, गन्दी बदबू, गंभीर सूजन, जीवाणु संक्रमण हो जाता है, पशु अवसाद का शिकार हो जाता है व अयन में कड़ापन/फाइब्रोसिस हो जाता है.

क्या है इस बीमारी का
यह रोग कई तरह के जीवाणु के कारण होता है साथ ही वायरस, फफूंद एवं माइकोप्लाज्मा आदि से भी हो सकता है। हमारे देश में यह मुख्य रुप से स्टाफीलोकोकस नामक जीवाणु के कारण होता है। जीवाणु के अलावा पशुओं के रखरखाव में लापरवाही भी इसका मुख्य कारण है। पशु बांधने के स्थान पर गंदगी, गंदे हाथों से दूध निकालना, थन पर घाव, गंदगी इत्यादि से भी थनेला रोग होने की संभावना होती है।

थन में इंफेक्शन कैसे होता है?
थन में दूध के मार्ग के जरिए इंफेक्शन अंदर प्रवेश करता है. जब पशु नीचे बैठता है तो गंदगी के संपर्क में आने से जीवाणु थन के जरिए अयन तक पहुंच जाते हैं और वहां दूध बनाने वाली ग्रंथियों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं. जिससे अंदर की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं. तथा बाद में इन ग्रंथियों में फाइब्रोसिस हो जाने के कारण कठोर हो जाती हैं. अंत में दूध का बनना बंद हो जाता है. इंफेक्शन एक या सभी थन में हो सकता है. ऐसी स्थिति में सही इलाज जजरूरी है. Wi मिले तो थन ठीक हो सकते हैं. अन्यथा हमेशा के लिए थन खराब हो जाता है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

पशुपालनसरकारी स्की‍म

Scheme: हरियाणा सरकार ने पशुपालकों के लिए की 5 बड़ी घोषणाएं

नई दिल्ली. केंद्र सरकार हर हाल में पशुपालकों की इनकम को बढ़ाना...

सरसों के तेल का सेवन करना बहुत जरूरी है. बाजार का सप्लीमेंट फूड खिलाने से आगे लंबे समय तक दूध नहीं ले पाएंगे. इसलिए बहुत जरूरी है दाने के साथ-साथ घरेलू चीजों से दूध की मात्रा को बढ़ाएं.
पशुपालन

Animal Husbandry: एमवीयू के संचालन में लापरवाही की मिली रिपोर्ट, कारण बताओ नोटिस की जारी

नई दिल्ली. पशुपालन विभाग द्वारा संचालित मोबाइल वेटनरी यूनिट (एमवीयू) के प्रभावी...

animal pregnancy
पशुपालन

Animal Husbandry: पशुपालकों की छोटी-छोटी गल​तियों से पशुपालन में होता है बड़ा नुकसान

नई दिल्ली. पशुपालन को सही प्लानिंग और सटीक जानकारी के साथ करना...

पशुपालन

Animal News: मुंबई में टाटा ट्रस्ट का अत्याधुनिक वेटरनरी डायलिसिस यूनिट किया गया चालू

नई दिल्ली. लुधियाना की गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी...