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Government Scheme: क्या है प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और कैसे लें इसका लाभ, जानिए यहां

गर्मी में भी मछली के तालाबों में पानी का स्तर लगभग 6 फीट रखा जाना चाहिए. इससे निचले हिस्से में पानी का तापमान उपयुक्त रहता है.
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. देश में खेती किसानी के अलावा मुर्गी पालन, पशुपालन, मछली पालन व बत्तख पालन करके किसान अपनी इनकम को और ज्यादा बढ़ा रहे हैं. अगर बात करें मछली पालन की तो केंद्र सरकार के साथ-साथ कई राज्य सरकारें भी मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी आदि की व्यवस्था कर रही हैं. वहीं मछली पालन करने वालों के लिए केंद्र सरकार ने बीमा भी जारी किया है. ये बीमा मछली पालन से जुड़े सभी लोगों के लिए है. इससे तेजी के साथ किसान मछली पालन की ओर रुख कर रहे हैं. यही वजह है कि मछली पालन तेजी के साथ बिजनेस में बदल रहा है. जबकि मछली पालन में कई ऐसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल करके आप इसे और ज्यादा फायदेमंद बना सकते हैं.

मछली पालन में खास करके किसान अच्छी खासी आमदनी कमा सकते हैं. मछली पालन किसानों की आय को दोगुना करने का एक बेहतरीन जरिया भी है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में ग्रामीण इस व्यवसाय की तरफ रोक भी कर रहे हैं और उन्हें अच्छी कमाई भी हो रही है.

जानिए क्या है प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मछुआरे बीमा के लिए पात्र होंगे. योजना के तहत बीमा कवरेज के लिए क्या करना है लिए हम आपको इसकी जानकारी देते हैं. मृत्यु या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में पांच लाख तथा आशिक विकलांगता की स्थिति में ढाई लाख रुपए के बीमा का प्रावधान है. साथ ही दुर्घटना की स्थिति में अस्पताल में भर्ती और इलाज पर होने वाले खर्चों को भी बीमा के अंतर्गत शामिल किया गया है. इस बीमा के अंतर्गत मछुआरों की श्रेणी में मछली श्रमिकों मछली किसने और मछली पकड़ने वह मछली पालन से संबंधित समस्त गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल किसी भी अन्य श्रेणी के व्यक्ति को भी शामिल किया गया है.

12 महीने की अवधि का है बीमा कवर: बीमा कवर 12 महीने की अवधि के लिए है और प्रीमियम का भुगतान सालाना किया जाता है. प्रीमियम राशि का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा योजना में निर्धारित शर्तों की अनुरूप की जाती है और लाभार्थी को कोई योगदान नहीं देना है.

मछली की है बेहद डिमांड: मछली पालन करना भारत में हमेशा ही एक अच्छा विकल्प माना गया है. क्योंकि भारत में 35 मिलियन मीट्रिक टन मछलियों की मांग है, जिसे आज भी पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों पर निर्भर होना पड़ता है. क्योंकि भारत में ज्यादातर ट्रेडिशनल तरीके से ही मछली पालन किया जाता है.

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