नई दिल्ली. याददाश्त का कमजोर होना इंसान में चिड़चिड़ेपन को बढ़ावा देता है. किसी सामान को कहीं रखकर भूल जाना, किसी से कुछ बात करनी है, लेकिन जैसे ही फोन उठाते हैं तो वो बात भूल जाते हैं कि कहना क्या है. और भी बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो कमजोर याददाश्त से जुड़ी होती हैं. मेडिकल की भाषा में इसे डिमेंशिया कहा जाता है. ये लक्षण अक्सर 50 साल और उससे ज्यादा की उम्र वालों में ज्यादा देखे जाते हैं. ऐसा दावा किया जाता है कि अभी तक इसका कोई इलाज नहीं तलाशा जा सका है. लेकिन इसका क्या अंडों से कोई संबंध है. तो जवाब है हां.
हाल ही में एक नई रिसर्च से इसका खुलासा हुआ है कि डिमेंशिया और अंडों का आपस में गहरा संबंध है. रिपोर्ट बताती है कि जिस डिमेंशिया का दवाखाने में कोई इलाज नहीं है उसे अंडे खाने से रोका जा सकता है. और ऐसा भी नहीं है कि उसके लिए दिनभर में 8-10 अंडे खाने पड़ेंगे. रिपोर्ट के मताबिक चीन में डिमेंशिया पीडि़तों की संख्या ज्यादा है. वहां अंडों की खपत और उनका उत्पादन दोनों ही ज्यादा है. हाल ही में जर्नल न्यूट्रिएंट्स ने इस रिपोर्ट का खुलासा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर डिमेंशिया से पीडि़तों की संख्या 5.5 करोड़ है. इतना ही नहीं साल 2050 में ये संख्या बढ़कर 15 करोड़ से ज्यादा हो सकती है. इसकी वजह ये है कि हर साल करीब एक करोड़ लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक डिमेंशिया की रोकथाम तो मुमकिन है लेकिन अभी इसका कोई इलाज नहीं है.
जानें याददाश्त और अंडे के बारे में क्या कहती है रिपोर्ट
डिमेंशिया के जोखिम को कम करने में खाने-पीने की क्या भूमिका हो सकती है, इस रिसर्च का यही विषय था. रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि जो लोग अपने खाने में सीफूड और भूमध्यसागरीय आहार (Mediterranean Diet) में शामिल अंडा खाते हैं तो वो डिमेंशिया से सुराक्षिडत हो सकते हैं. रिपोर्ट का कहना है कि अंडे पोषक तत्वों और कई दूसरे फायदेमंद कंपाउंड से भरपूर होते हैं. इसमे विटामिन डी, फोलेट और कोलीन भी शामिल होता है. इतना ही नहीं अंडे प्रोटीन का एक जरूरी और सस्ता सोर्स भी है. यूएसए में अंडे का इस्तेमाल कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बढ़ा सकता है, लेकिन एशियाई और यूरोपीय आबादी कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने के जोखिम से फ्री है. एक्सपर्ट का कहना है कि अंडे की जर्दी में पाया जाने वाला कोलीन याददाश्त बढ़ाने में अहम रोल निभाता है. कोलीन ही डिमेंशिया को रोकने में भी मदद करता है.
233 इंसानों पर ऐसे की गई रिसर्च
रिसर्च करने वाले एक्सपर्ट का कहना है कि उनहोंने 233 व्यक्तियों को रिसर्च के लिए भर्ती किया था. ये डिमेंशिया से पीडि़त थे. ये भी लोग 50 साल की उम्र से ऊपर के थे. इन सभी लोगों को तीन कैटेगिरी में बांटा गया था. कुछ ऐसे थे जिन्हें दिन में दो बार अंडा खाने को दिया गया. कुछ को हफ्ते में एक बार और कुछ को महीने में एक बार अंडा खाने को दिया गया. और इसके बाद रिसर्च में ये सामने आया कि रोजाना अंडे खाने वालों के बीच डिमेंशिया का जोखिम कम हुआ था.
इसलिए कहा जाता है अंडे को कंपलीट डाइट
अंडा एक संपूर्ण प्रोटीन सोर्स है और इसमे ग्रोथ के लिए जरूरी सभी नौ अमीनो एसिड होते हैं.
अंडे खाने से लाल खून कोशिका निर्माण और नर्वस सिस्टम को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं.
अंडे रोग प्रतिरोधक क्षमता कार्य को बनाए रखकर हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं.
अंडे एनर्जी प्रोडक्शन और फैट और स्टेरॉयड हार्मोन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
अंडा एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है.
अंडा आपकी कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है और थायरॉयड के लिए बेहतर होता है.
अंडा खून में ऑक्सीजन परिवहन और ऊर्जा उत्पादन के लिए बहुत खास होता है.
अंडा थकान को रोकता है और समग्र जीवन शक्ति को बढ़ाता है.










