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Animal Husbandry: भैंस के बछड़े को दस्त के दौरान दूध पिलाना चाहिए या नहीं, जानें यहां

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प्रतीकात्मक तस्वीर: Livestockanimalnews

नई दिल्ली. जन्म के बाद पशु के बछड़े का खास ख्याल करना चाहिए. क्योंकि उसने अभी अभी जन्म लिया है इसलिए उनकी स्पेशल केयर करनी होती है. कई बार पशुपालक ये सवाल करते हैं कि जब कभी बछड़े को दस्त हो जाए तो उन्हें क्या खिलाएं-पिलाएं, उन्हें दूध पिलाया जा सकता है या नहीं. अगर पशु पालकों को अगर इस सवाल का जवाब नहीं मालूम होगा तो बछड़े को नुकसान होगा. आइए यहां जानते हैं कि बछड़े को दूध पिलाना चाहिए या नहीं और उसे क्या-क्या खिलाया-पिलाया जा सकता है.

नहीं देना चाहिए चारा
बीमार बछड़े के लिए दूध का आदर्श स्रोत भैंस है और दूध के विकल्प आमतौर पर डायरिया के रोगी के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं. हालांकि कुछ केस में डायरिया से पीड़ित बछड़े को पशु चिकित्सक दूध पिलाने की अनुमति देते हैं. इसके अलावा ओरल इलेक्ट्रोलाइट घोल भी पिलाया जाना चाहिए. डायरिया पीड़ित बछड़े अच्छी शारीरिक स्थिति में हैं, लेकिन उदास हैं और दूध नहीं पीना चाहते हैं तो उन्हें चारा नहीं देना चाहिए. (24 घंटे के लिए दूध देना बंद कर देना चाहिए). जैसे-जैसे वे मजबूत हो जाते हैं और दूध पीने के लिए तैयार हो जाते हैं, उन्हें धीरे-धीरे (दूसरे दिन BW/d का 5%) और अगले 2-3 दिनों में धीरे-धीरे 10% BW/d तक बढ़ाया जा सकता है.

इलेक्ट्रोलाइट घोल पिलाना चाहिए
डायरिया की पूरी अवधि के दौरान मौखिक इलेक्ट्रोलाइट घोल अलग से पिलाया जाना चाहिए. मौखिक आहार के लिए बाइकार्बोनेट या साइट्रेट युक्त घोल के बजाय इलेक्ट्रोलाइट युक्त एसीटेट तैयारी को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि यह मिक की पाचन क्षमता में हस्तक्षेप नहीं करता है. बहुत कमजोर बछड़ों में, आंत कमजोर हो जाती है. रुमेन में जमा द्रव किण्वन कर सकता है और सूजन का कारण बन सकता है. डायरिया से पीड़ित जो बछड़े दूध पीने को तैयार हैं, लेकिन किसानों द्वारा दूध न देने के कारण कमजोर हो गए हैं, उन्हें धीरे-धीरे दोबारा दूध पिलाने की जरूरत है.

मौत का बन जाता है कारण
कुछ बछड़ों में आमतौर पर दूध के प्रति कम सहनशीलता होती है और जब वे दूध पीते हैं तो उनकी स्थिति खराब हो जाती है और कुछ बछड़े दूध लेने से इनकार कर देते हैं. ऐसे बछड़ों को उच्च ऊर्जा (ग्लूकोज 70 ग्राम/लीटर युक्त) ओर इलेक्ट्रोलाइट पिलाना चाहिए.​ डीहाईड्रेशन एसिडोसिस दस्त से छोटे जानवरों की मृत्यु के प्रमुख कारण हैं. बीमार पशुओं में डीहाईड्रेशन की स्थिति और पानी और इलेक्ट्रोलाइट सेवन की सावधानी से निगरानी की जानी चाहिए. बीमार पशु को सादा पानी और नमक तथा इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त पानी देना चाहिए.

ओरल इलेक्ट्रोलाइट घोल ऐसे करें तैयार
ओरल इलेक्ट्रोलाइट घोल में सामान्य तौर पर सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड होना चाहिए और इसे 20 लीटर पानी में 90 ग्राम सोडियम क्लोराइड और 30 ग्राम पोटेशियम क्लोराइड घोलकर तैयार किया जा सकता है. यदि पशु अपनी तरल पदार्थ की कमी को स्वेच्छा से ठीक नहीं करता है, तो रुमेन गतिशीलता मौजूद होने पर इलेक्ट्रोलाइट समाधान को पेट की नली द्वारा दिया जा सकता है.

Written by
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