नई दिल्ली. पशुओं को अगर सही चारा दिया जाए तो उनकी सेहत अच्छी रहती है और इससे उत्पादन भी बेहतर होता है. साथ ही चारा की क्वालिटी अच्छी हो तो दूध की क्वालिटी भी बेहतर होती है. हालांकि अक्सर पशुपालकों की समस्या होती है कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं होती कि कौन सा चारा कब दिया जाना चाहिए. मसलन, किस महीने में किस तरह का चारा पशु के लिए बेहतर है और इससे उत्पादन में कोई कमी न हो. ताकि पशुपालक इससे होने वाले नुकसान से खुद को बचा सकें.
एक्सपर्ट के मुताबिक लोबिया का चारा बहुत ही ज्यादा पौष्टिक होता है. इसमें 17 से 18 फ़ीसदी तक प्रोटीन की मात्रा होती है. इसके अलावा इसमें कैल्शियम और फास्फोरस भी पर्याप्त मात्रा में होता है. इसे अकेले और गैर दलहनी फसलों जैसे ज्वाह या मक्का के साथ बो सकते हैं. वहीं ग्वार शुष्क क्षेत्र के लिए पौष्टिक एवं फलीदार चारा है. अक्सर इसे ज्वार या बाजरे के साथ मिलकर बोया जाता है. इसमें 13 से 15 फ़ीसदी तक प्रोटीन पाया जाता है.
कितना देना चाहिए दाना: विशेषज्ञ भी कहते हैं कि साधारण तौर पर दिन में दो बार भोजन देना चाहिए. भोजन के सही पाचन के लिए 8 से 10 घंटे के अंतर पर भोजन देना सही माना जाता है. ज्यादा दूध देने वाली गायों को दिन में चार से पांच बार चारा के साथ दाना खिलाते रहें. केवल दाने की अधिक मात्रा से पशुओं की पाचन शक्ति बिगाड़ सकती हैं. साथ ही दूध का उत्पादन भी घट जाता है. दुधारू पशुओं को दूध निकालने से पहले दाना और बाद में चारा देना बेहतर होता है.
क्वालिटी चारा देना चाहिए: इसके अलावा उन्हें आहार के साथ ही रोजाना खनिज मिश्रण और नमक भी दें. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में पशुओं के आहार पर कम ध्यान दिया जाता है. पशुओं को सर्वोत्तम चारा तो दिया जाना चाहिए इसके साथ ही इस बात का भी ख्याल करना चाहिए कि कौन सा चारा कब खिलाया जाए. इन बातों का ध्यान रखकर ही उनका स्वास्थ्य बेहतर रखा जा सकता है और उसे बेहतर उत्पादन भी लिया जा सकता है.
कौन सा चारा कब खिलाएं: पशुओं को जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल में बरसीम, लुसर्न, जई, मेथी, भूसा, हे और साइलेज का चारा देना बेहतर होता है. जबकि मई, जून में पशुओं को लुसर्न, लोबिया, भूसा और सालेज का चारा देना चाहिए. जुलाई, अगस्त और सितंबर में हरी जोंदरा, हरी ज्वार और लोबिया का चारा पशुओं के लिए बेहतर माना जाता है. जबकि अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में ज्वार, ग्वार, नेपियर, सूडान, भूसा का चारा पशुओं को देने से उत्पादन बेहतर रहता है.
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