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Fisheries में ट्रेसबिलिटी सिस्टम आने से मोबाइल फोन पर मिलेगी मछली की हर जानकारी, जानें क्या होगा फायदा

अगर आप छोटे गड्ढे में मछली पालन का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको तालाब के आकार को चुनना होगा. एक से 2000 स्क्वायर फीट के तालाब में आप बढ़िया मछली पालन कर सकते हैं.
तालाब में मछली.

नई दिल्ली. फिशरीज में टेक्नोलॉजी को मजबूत करने के लिए मछली पालन नेटवर्क को स्ट्रॉन्ग करने की कवायद शुरू हो गई है. देशभर में फिशरीज में ट्रेसबिलिटी सिस्टम को लागू करने की तैयारी चल रही है. इसको लेकर मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (MoFAH&D) ने 25 अक्टूबर 2024 को एक बैठक बुलाई, जिसमें मछली पालन पालन विस्तार नेटवर्क की भूमिका पर चर्चा की गई. बताया गया कि फिशरीज में ट्रेसबिलिटी सिस्टम से कई फायदा होगा. इससे पैक्ड सी फूड को लेकर तमाम जानकारी बेहद ही आसानी मिल जाएगी, जो आम ग्राहक जानना चाहते हैं.

पैक्ड सी फूड पर ट्रेसबिलिटी सिस्टम के तहत एक बार कोड दिया जाएगा. जिसे स्कैन करके ग्राहक ये जान सकेंगे कि वो किस समुद्र की मछलियों को खरीद रहे हैं. किस तालाब में पली मछली का स्वाद चखने वाले हैं. वहां कोई बीमारी तो नहीं थी. मछली की कब तक एक्सपायरी डेट है, ये कब पैक हुई थी, इसमें क्या-क्या क्वालिटी है, आदि की जानकारी ग्राहकों को अपने मोबाइल फोन पर ही मिल जाएगी. बस इसके लिए ग्राहकों को पैक पर दिए गये बार कोड को स्कैन करना होगा. वहीं मछली पालकों के लिए भी कई जरूरी जानकारी मिलेगी. गौरतलब है कि डेयरी में भी इस तरह के सिस्टम पर काम हो रहा है.

कैसे करेगा ट्रेसबिलिटी सिस्टम काम
हाल ही में गिर और बद्री गाय का बना हुआ घी बाजार में आया है. बद्री गाय के दूध से बने घी को उत्तराखंड कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ने बनाया है. जबकि गिर गाय के घी को मदर डेयरी ने बनाया है. मदर डेयरी ने ही ट्रेसबिलिटी सिस्टम को भी ईजाद किया है. इस सिस्टम की मदद से डेयरी प्रोडक्ट के बारे में हर एक जानकारी इसके इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की मोबाइल स्क्रीन पर मिल रही है. इसी तरह से फिशरीज में भी ट्रेसबिलिटी सिस्टम काम करेगा. जिसके जरिए ग्राहकों को सी पैक्ड फूड पर दिए गए बार कोड को स्कैन करने से ये पता चल जाएगा कि कब मछली को पकड़ा गया, किस प्रोसेसिंग प्लांट में आई थी. क्या मछली को कोई बीमारी तो नहीं थी. ये खाने के लिए सही है कि नहीं? आदि.

मछली पालकों को आसानी से मिलेगी सरकारी मदद
बैठक की अध्यक्षता कर रही डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि अंतिम छोर तक संपर्क स्थापित करने में मत्स्य पालन विस्तार की महत्वपूर्ण भूमिका है. इससे मछली पालकों को आवश्यक जानकारी, संसाधन तथा सरकारी सहायता से जोड़ने में मदद मिलेगी. डॉ. लिखी ने मत्स्य पालन, पशुपालन तथा डेयरी में विस्तार तथा आउटरीच के माध्यम से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मजबूत करने के उपायों की सिफारिश करने के लिए हाल ही में गठित उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय समिति तथा उच्च स्तरीय सचिव समिति का भी जिक्र किया. मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने पीएम-एमकेएसएसवाई के घटकों तथा लाभों तथा देश भर में विभाग की योजनाओं/कार्यक्रमों के लाभार्थियों तक पहुंचने में आईसीएआर विस्तार नेटवर्क के महत्व पर प्रकाश डाला. जबकि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव सैमुअल प्रवीण कुमार ने भारत में कृषि विस्तार प्रणाली पर प्रस्तुति दी तथा कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए वर्चुअली एकीकृत प्रणाली (विस्तार) परिवर्तन प्रयासों के बारे में बताया.

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