Home मछली पालन World Fisheries Day: सिर्फ समुद्र इलाकों में ही फिशरीज सेक्टर से 50 लाख लोगों को इनकम, यहां भी फायदा
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World Fisheries Day: सिर्फ समुद्र इलाकों में ही फिशरीज सेक्टर से 50 लाख लोगों को इनकम, यहां भी फायदा

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मछली पकड़ते मछुआरे (फोटो CMFRI)

नई दिल्ली. भारत सरकार ने अपनी बजट घोषणा (2025-26) में इस बात का ऐलान किया था कि भारत विश्व स्तर पर मछली उत्पादन और जलीय कृषि में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. अगर पिछले 11 साल के ही रिकॉर्ड पर गौर किया जाए तो भारत में 100 टन मछली उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है. वहीं भारत के समुद्री खाद्य निर्यात का मूल्य 60 हजार करोड़ रुपए है. जबकि अभी भी समुद्री इलाकों की क्षमता का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया जा सका है. जिसको लेकर सरकार एक ढांचा तैयार कर रही है. ताकि इसका इस्तेमाल हो सके.

केंद्र सरकार की तरफ से बताया गया है कि समुद्री क्षेत्र की अप्रयुक्त क्षमता को उजागर करने के लिए, हमारी सरकार अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह तथा लक्षद्वीप पर विशेष ध्यान देते हुए, भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और विशाल सागरों से मत्स्य पालन के टिकाऊ उपयोग के लिए एक सक्षम ढाँचा लाया जाएगा.

फिशरीज सेक्टर की क्या हैं उपलब्धियां
बात करें भारत की 11,099 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और 23 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की तो 13 समुद्र तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 50 लाख से अधिक मछुआरा समुदाय को आजीविका प्रदान करता है.

अंतर्देशीय मत्स्य पालन जिसमें तालाब, टैंक, नदियां और झीलें शामिल हैं, उसमें भी ग्रोथ हुई है. साल 2013-14 से 2024-25 के बीच 142 फीसद की वृद्धि हुई है.

अंतर्दे​शीय मछली पालन से जहां देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है तो वहीं इसका दूसरा फायदा ये है कि किसानों की इनकम भी बढ़ रही है.

वहीं समुद्री मत्स्य पालन समुद्री खाद्य निर्यात और लाखों लोगों को पोषण संबंधी सहायता प्रदान करके देश की समुद्री अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

हालांकि, देश के ईईजेड की पूरी क्षमता, विशेष रूप से गहरे समुद्र में टूना संसाधनों सहित उच्च मूल्य वाले संसाधनों का अब तक उतना इस्तेमाल नहीं हो सका है, जितना होना चाहिए.

सरकार की ओर से बताया गया कि अब श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया, ईरान और यूरोपीय देश वर्तमान में हिंद महासागर क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में टूना मछलियाँ पकड़ी जा रही है.

जबकि भारतीय मछली पकड़ने के बेड़े निकटवर्ती जल तक ही सीमित थे और मत्स्य पालन के टिकाऊ उपयोग पर नए ईईजेड नियमों की अधिसूचना से पहले पिछड़ रहे थे.

निष्कर्ष
सरकार की तरफ से फिशरीज सेक्टर को आगे ले जाने में अहम योगदान दिया गया है. खासतौर प्रधानमंत्री मत्स्य सपंदा योजना हजारों करोड़ रुपए खर्च करके इस सेक्टर को और आगे ले जाने का काम किया जा रहा है. ताकि हर तबके को फायदा पहुंच सके.

Written by
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