Home मछली पालन Fisheries: 70 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन के साथ बढ़ेगा एक्सपोर्ट, नौकरी के अवसर भी होंगे पैदा
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Fisheries: 70 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन के साथ बढ़ेगा एक्सपोर्ट, नौकरी के अवसर भी होंगे पैदा

अगर आप छोटे गड्ढे में मछली पालन का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको तालाब के आकार को चुनना होगा. एक से 2000 स्क्वायर फीट के तालाब में आप बढ़िया मछली पालन कर सकते हैं.
तालाब में मछली.

नई दिल्ली. साल 2025 तक तक देश में 70 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन बढ़ने का अनुमान है. सरकार के मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से दावा किया गया है कि PMMSY योजना के कारण मछली उत्पादन में वृद्धि हुई है तो वहीं आने वाले समय में एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा. जबकि प्रति वर्ष औसत मछली उत्पादन में भी इजाफा हुआ है. इसके अलावा इस सेक्टर में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि देशभर में करीब 55 लाख रोजगार के अवसर इस योजना के कारण पैदा हुए हैं.

मंत्रालय की ओर से बताया गया कि वित्तीय की वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक 5 वर्षों के दौरान 20 हजार 50 करोड़ रुपए की कुल लागत पर प्रमुख योजना प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) को लागू किया गया है. ताकि 2025 तक 70 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मत्स्य उत्पादित की जा सके. वहीं अनुमान लगाया जा रहा है कि जल कृषि उत्पादकता को राष्ट्रीय औसत 3 टन से बढ़ाकर 5 टन प्रति हेक्टेयर किया जाएगा, पोस्ट हार्वेस्ट हानि को 25 फीसद से घटाकर लगभग 10 फीसद तक लाया जाएगा.

निजी निवेश को किया जाएगा प्रोत्साहित
रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, फिशरीज निर्यात को 46,589 करोड़ रुपए (2018-19) से बढ़ाकर 2024-25 तक 1 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचाया जाएगा. पांच वर्षों की अवधि के दौरान प्रति व्यक्ति मछली की खपत (फिश कन्सम्पशन) को मौजूदा 5-6 किलोग्राम से बढ़ाकर 12 किलोग्राम किया जाएगा और फिशरीज क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने तथा उद्यमिता के विकास को आसान बनाया जाएगा. मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार ने बीते चार वित्तीय वर्षों वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24) और वर्तमान वित्तीय वर्ष (2024-25) के दौरान PMMSY के तहत 8871.45 करोड़ रुपए के केंद्रीय अंश के साथ कुल 20864.29 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य कार्यान्वयन एजेंसियों के मात्स्यिकी विकास प्रस्तावों को स्वीकृति दी है.

योजनाओं से हुए ये 5 फायदे
वहीं तमाम योजनाओं के जरिये से सरकारों, मछुआरों, मछली किसानों और अन्य मात्स्यिकी हितधारकों के सम्मिलित प्रयासों के नतीजे में अन्य उपलब्धियों के अलावा (1) विगत 5 वर्षों के दौरान देश में वार्षिक मत्स्य उत्पादन 2019-20 में 141.64 लाख टन से बढ़कर 2022-23 में 175.45 लाख टन के सर्वकालिक रिकॉर्ड तक पहुंच गया है. (2) मात्स्यिकी विकास परियोजनाओं के कारण फिशिंग और जल कृषि से संबंधित गतिविधियों में लगभग 58 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ है. (3) मात्स्यिकी निर्यात 2019-20 में 46662.85 करोड़ रुपए से बढ़कर 2023-24 में 60524.89 करोड़ रुपए हो गया है. (4) प्रति व्यक्ति मत्स्य की खपत 5-6 किलोग्राम से बढ़कर 12-13 किलोग्राम हुआ है. (5) जलीय कृषि उत्पादकता में 4.7 टन प्रति हेक्टेयर की वृद्धि, (5) पोस्ट हार्वेस्ट हानि घटकर 10-15 फीसद हुई है.

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