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Fisheries: तेजी से बढ़ रहा राजस्थान में मछली उत्पादन, युवाओं को मिल रहा रोजगार

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मछली पालन में हर राज्य के मछली पालक दिलचस्पी दिखा रहे हैं. देश के हर राज्य में बड़े पैमाने पर मछली पालन किया जा रहा है. राजस्थान में जहां बारिश का औसत अनुमान करीब 57 सेमी होता है. यहां भी मछली पालन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. राजस्थान मछली उत्पादन के जरिए युवाओं को रोजागार दे रहा है. राजस्थान की अरावली पर्वतमाला बेहद फेमस है. इसके पश्चिमी राज्य के जल संसाधन और दक्षिणी ढलान से निकलने वाली नदियां राजस्थान का जल संसाधन रासायनिक अरब सागर में तथा पूर्वी ढलान से निकलने गुणों के आधार पर दो समूहों में (मीठा जल वाली नदियां बंगाल की खाड़ी में समाहित और खारा जल) बांटा है. राजस्थान में अनियमित बरसात और परिवर्तनशील मौसम के कारण जलवायु में विविधता (अर्द्धशुष्क से लेकर शुष्क) पाई जाती है. यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.

राजस्थान क्षेत्रफल के ​हिसाब से देश का बड़ा राज्य है. इसका भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 3.42 लाख वर्ग किमी है. जिसमें कुल 4.6 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र जलाशय, तालाब/टैंक और नदियों एवं नहरें हैं. राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र और सम्बद्ध सेवाओं में मछली पालन भी होता है. इसके कारण राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में मछली क्षेत्र की भागीदारी बढ़कर 28.70 प्रतिशत (वर्ष 2022-23) हो गई है. राज्य में उपलब्ध जल संसाधनों में लगभग 150-160 मत्स्य प्रजातियों में मेजर कार्प, माइनर कार्प, विदेशी कार्प, कैट फिश तथा अन्य मत्स्य समूह मुख्य हैं.

इतना बढ़ गया मछली उत्पादन: राजस्थान का मछली उत्पादन 12,968 मीट्रिक टन (वर्ष 1999-2000) से बढ़कर 91349.43 मीट्रिक टन (वर्ष 2023-2024) हुआ है. राज्य का राजस्व 570.00 लाख रुपयों (वर्ष 1999-2000) से बढ़कर 7442.83 लाख रुपये (वर्ष 2023-2024) हो गया है. राजस्थान के जल संसाधनों की मछली उत्पादन क्षमता बहुत अधिक है. यदि इनका प्रबंधन वैज्ञानिक या अत्याधुनिक तरीकों से किया जाए तो राज्य का मछली उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. राज्य की इकोनोमी को मजबूत बनाने और युवाओं को रोजगार देने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

मछली पालन की ये हैं जगहें: राजस्थान में पानी के स्रोत बड़े, मध्यम और छोटे आकार के जलाशयों (1.76 लाख हेक्टेयर), तालाब और टैंकों (2.55 लाख हेक्टेयर) और नदियों एवं नहरों (0.30 लाख हेक्टेयर) के रूप में उपलब्ध है. देश के जल संसाधन (49 लाख हेक्टेयर) का लगभग मिलता है, जो अत्यधिक सीमित मात्रा में उपलब्ध है. राज्य में कुल 33.94 बिलियन क्यूबिक मीटर सतही जल संसाधन उपलब्ध हैं. जो देश के कुल सतही जल संसाधन का 1.6 प्रतिशत है. राजस्थान में लगभग 4.6 लाख हेक्टेयर मध्य जलक्षेत्र है.

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