Home मछली पालन Fisheries: किचन-रूफ टॉप गार्डन की तरह कम पानी और कम जगह में होगा मछली पालन
मछली पालन

Fisheries: किचन-रूफ टॉप गार्डन की तरह कम पानी और कम जगह में होगा मछली पालन

जैविक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान पुरस्कार इस वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर (डॉ.) रीना चक्रवर्ती को प्रदान किया गया है. गौरतलब है कि यह पुरस्कार 2015 से भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष दिया जाता है. इस पुरस्कार के लिए डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने उन्हें बधाई दी और कहा कि विश्वविद्यालयों का उदेश्य ऐसे शोध को बढ़ावा देना होना चाहिए जो राष्ट्र की प्रगति में सहयोग दें.
दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर को राष्ट्रपति ने प्रदान किया अनुसंधान पुरस्कार अनमोल नाथ बाली

नई दिल्ली। आपने रूफ टॉप किचन, होटल, रेस्टोरेंट सुने हैं, अब मछली भी रूफ टॉप गार्डन की तरह पाल सकते हैं. जी हां, ये काम करके दिखाया है, प्रोफेसर रीना ने, जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कृत किया है. एक्वाकल्चर अपशिष्ट को विभिन्न बायो-फिल्टर के साथ हटा दिया जाता है और सिस्टम में फिर से उपयोग किया जाता है. ऐसे बायोफिल्टर में से एक कुछ पौधे की प्रजातियां हैं, जिनका उपयोग पत्तेदार सब्जियों के रूप में भी किया जाता है. इसे एक्वापोनिक्स सिस्टम के रूप में जाना जाता है, जिसने मछली पालकों को अतिरिक्त आय प्रदान की.

मछली पालन में फीड की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. फीड की पसंद न केवल मछलियों के प्रकार के साथ बदलती है, बल्कि उनकी उम्र के साथ भी बदलती है. चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने कुछ अनूठी जड़ी-बूटियों के साथ मछली-आयु विशिष्ट फीड विकसित की है, जो न केवल उनकी वृद्धि को बढ़ाएगी बल्कि उनकी प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाएगी. उत्कृष्ट नवाचार, अनुसंधान कार्य और प्रौद्योगिकी विकास के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पुरस्कृत किया गया है. राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में 3 मार्च को आयोजित समारोह में 8वें विजिटर्स अवार्ड, प्रदान किए थे.

दिल्ली विवि की प्रोफेसर रीना चक्रवर्ती जैविक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान पुरस्कार इस वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर (डॉ.) रीना चक्रवर्ती को प्रदान किया गया है. गौरतलब है कि यह पुरस्कार 2015 से भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष दिया जाता है. इस पुरस्कार के लिए डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने उन्हें बधाई दी और कहा कि विश्वविद्यालयों का उदेश्य ऐसे शोध को बढ़ावा देना होना चाहिए जो राष्ट्र की प्रगति में सहयोग दें.

जानिए कौन हैं डॉक्टर रीना चक्रवर्ती प्रोफेसर चक्रवर्ती ने 1992 में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राणी शास्त्र विभाग में लेक्चरर के रूप में ज्वाइन किया था. वर्तमान में वह एक वरिष्ठ प्रोफेसर हैं और विभागाध्यक्ष का पद संभाल रही हैं. प्रोफेसर चक्रवर्ती ने अपने नियमित कार्यभार के अलावा मछली पालन में उन्नत अनुसंधान करने के लिए एक परिष्कृत अनुसंधान प्रयोगशाला विकसित करने का प्रयास किया. प्रोफेसर चक्रवर्ती ने कहा कि विश्वविद्यालय में उत्कृष्टता पैदा करने में कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अहम भूमिका रही है. विभाग में चल रहे शोध का अवलोकन करने के लिए कुलपति समय-समय पर विभाग का दौरा करते रहते हैं और संकाय सदस्यों के साथ-साथ शोध छात्रों से भी बातचीत कर के उन्हें प्रेरित करते रहते हैं। इसी का परिणाम है कि डीयू को यह पुरस्कार मिला है.

प्रो. चक्रवर्ती का शोध योगदान प्रोफेसर रीना चक्रवर्ती ने बताया कि अब मछली की खपत में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन अंतर्देशीय मछली पालन के लिए जगह और पानी एक सीमित कारक रहा है. किचन गार्डन या रूफ टॉप गार्डन की तरह, उन्होंने और उनकी टीम ने इन-हाउस माइक्रो-क्लाइमेट कंट्रोलिंग सिस्टम तैयार किया है, जहां पानी और जगह की न्यूनतम उपलब्धता के साथ साल भर विभिन्न प्रकार की मछलियां पाली जा सकती हैं. यह रिसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) पर्यावरण के अनुकूल और लागत प्रभावी है.

शोध का प्रभाव प्रो. चक्रवर्ती और उनकी टीम ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में किसानों के तालाबों में कई किसान-वैज्ञानिक संपर्क कार्यक्रम और क्षेत्र प्रदर्शन आयोजित किए हैं, ताकि उनके अभ्यासों के पैकेज का प्रसार किया जा सके. नॉर्वे के छात्र और बांग्लादेश, केन्या, तंजानिया, नेपाल और यूनाइटेड किंगडम के वैज्ञानिक एवं किसान भी डीयू की प्रयोगशाला में आ चुके हैं. हाल ही में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कौशल विकास कार्यक्रम की अवधारणा को शामिल किया गया है.

दिल्ली विवि के छात्र भी जुड़े प्रोफेसर चक्रवर्ती ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने भी मछली पालन में और सुधार पर जोर दिया है. उन्होंने जलीय कृषि पर एक नया पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों द्वारा बड़े पैमाने पर स्वीकार और सराहा गया है. इस कार्यक्रम से छात्रों को मछली चारा विकास, मोती संस्कृति और सजावटी मछली संस्कृति जैसे अपने स्वयं के उद्यम शुरू करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fish Farming: फिशरीज से जुड़े लोगों में सात थ्री-व्हीलर, आइस बॉक्स और नावों का किया वितरण

नई दिल्ली. बिहार के औरंगाबाद शहर में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन...

फिश एक्वेरियम की मछलियां बेहद ही संवेदनशील होती हैं.
मछली पालन

Ornamental Fish: महाराष्ट्र के एक सजावटी फिश ब्रूड बैंक से अमेरिका समेत 12 देशों में हो रहा एक्सपोर्ट

बनई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के...