Home सरकारी स्की‍म Scheme: पशुपालन में एक हजार करोड़ और मछली पालन में 600 करोड़ इंवेस्ट करेगी सरकार, पढ़ें फायदे
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Scheme: पशुपालन में एक हजार करोड़ और मछली पालन में 600 करोड़ इंवेस्ट करेगी सरकार, पढ़ें फायदे

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई) और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ किया. कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में लगातार और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के मकसद से ये ऐतिहासिक पहल है. इस कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने कहा कि ये पहल आगे बढ़ने, इनोवेशन और समावेशी विकास के माध्यम से देश के कृषि प्रधान जिलों में बदलाव लाएंगी. वहीं पीएम ने पशुपालन क्षेत्र में 947 करोड़ रुपए की 16 प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन और 219 करोड़ की एक प्रमुख परियोजना का शिलान्यास किया. जबकि मछली पालन के लिए 572 करोड़ की 7 नई परियोजनाओं की आधारशिला और 121 करोड़ की 9 परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2019 में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की स्थापना से इन क्षेत्रों को एक समर्पित नीतिगत समर्थन मिला और विकास में तेजी आई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ये क्षेत्र अब 10 करोड़ से अधिक आजीविका को बनाए रखते हैं, जिसमें महिलाएं 70 फीसद से अधिक डेयरी कार्यबल का गठन करती हैं, जो देश में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण समृद्धि का सच्चा आईना है.

फिशरीज सेक्टर को क्या मिलेगा फायदा
इस बात पर रोशनी डाली कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई), मत्स्य पालन अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) जैसी योजनाओं के माध्यम से मछली पकड़ने के बंदरगाह, हैचरी, फीड मिल और कोल्ड चेन जैसे आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए मत्स्य पालन क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा दिया गया है.

उन्होंने कहा कि आज भारत मछली उत्पादन के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है और इसमें 104 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. उत्पादन 2013-14 में 96 लाख टन से 2024-25 में 195 लाख टन हो गया है.

उन्होंने बताया कि इस अवसर पर 16 प्रमुख मत्स्य पालन परियोजनाओं (693 करोड़ रुपए से अधिक लागत की) का उद्घाटन किया गया, जो भारत में उत्पादकता, निर्यात और रोज़गार को और बढ़ावा देंगी.

पशुपालन सेक्टर की भी बल्ले-बल्ले
डेयरी और पशुपालन क्षेत्र की उपलब्धियों पर बोलते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दूध उत्पादन में 63 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है (2014-15 में 146 मिलियन टन से 2024-25 में 239 मिलियन टन तक) और भारत दूध उत्पादन के मामले में विश्व स्तर पर प्रथम स्थान पर है.

उन्होंने आगे कहा कि मवेशियों और भैंसों की उत्पादकता में 25 प्रतिशत से अधिक (दुनिया में सबसे तेज़ दर) वृद्धि हुई है.

पशुधन स्वास्थ्य के क्षेत्र में, खुरपका-मुंहपका रोग, ब्रुसेलोसिस, पीपीआर आदि के खिलाफ निःशुल्क राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत 125 करोड़ से अधिक टीके लगाए गए हैं, और 9 राज्य तेजी से एफएमडी-मुक्त स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे भारत के दूध निर्यात को और बढ़ावा मिलेगा.

निष्कर्ष
सिंह ने कहा कि पीएम-डीडीकेवाई किसानों की आय बढ़ाने, भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मज़बूत करने तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी क्षेत्रों को आत्मनिर्भर भारत के प्रमुख स्तंभों के रूप में स्थापित करने के पीएम के दृष्टिकोण को दर्शाता है. केंद्रीय मंत्री ने “ग्रामीण समृद्धि से राष्ट्रीय समृद्धि” की प्रतिबद्धता दोहराई और प्रौद्योगिकी-आधारित विकास, बेहतर आजीविका और सभी के लिए पोषण संबंधी कल्याण पर ज़ोर दिया.

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