Home मछली पालन Fisheries: 3 नवंबर से होगी राष्ट्रीय समुद्री मत्स्य पालन जनगणना, यहां पढ़ें इसके क्या हैं फायदे
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Fisheries: 3 नवंबर से होगी राष्ट्रीय समुद्री मत्स्य पालन जनगणना, यहां पढ़ें इसके क्या हैं फायदे

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने 31 अक्टूबर को केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) में राष्ट्रीय समुद्री मत्स्य पालन जनगणना (एमएफसी) 2025 के परिवार गणना चरण की आधिकारिक शुरुआत की. केंद्रीय मंत्री ने जनगणना में भाग लेने वाले सभी अधिकारियों और गणनाकारों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी मछुआरे और मत्स्य श्रमिक राष्ट्रीय मत्स्य पालन डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) पर रजिस्टर हों. क्योंकि प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत फायदा पाने के लिए ये जरूरी है. मछुआरे और मत्स्य पालक ही केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र होंगे जो पोर्टल पर पंजीकृत होंगे.

उन्होंने आगे कहा कि पंजीकरण सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है. समुद्री मत्स्य पालन जनगणना को डिजिटल और डेटा-संचालित मत्स्य पालन प्रशासन की दिशा में भारत की प्रगति में एक मील का पत्थर बताते हुए, कुरियन ने कहा “यह संस्करण भारतीय मत्स्य पालन के इतिहास में पहली बार पूरी तरह से डिजिटलीकृत डेटा संग्रह के रूप में एक प्रमुख तकनीकी बदलाव का प्रतीक है.”

जानें कब से शुरू होगी गणना
आधिकारिक शुरुआत के बाद, महाराष्ट्र और केरल से लाइव फील्ड डेटा संग्रह को आयोजन स्थल पर स्क्रीन पर प्रदर्शित किया गया है.

जिसमें दो खास रूप से डिजाइन किए गए मोबाइल एप्लिकेशन, व्यास भारत और व्यास सूत्र, का इस्तेमाल करके वास्तविक समय में डिजिटल डेटा संग्रह और गणना प्रक्रिया की केंद्रीय निगरानी को पेश किया गया.

इन्हें सीएमएफआरआई द्वारा वास्तविक समय में डेटा इकट्ठा करने, भू-संदर्भन और त्वरित सत्यापन को सक्षम करने के लिए विकसित किया गया था.

ये डिजिटल उपकरण फील्ड से केंद्रीय सर्वर तक निर्बाध डेटा सुनिश्चित करेंगे, जिससे प्रोसेसिंग समय कम करते हुए सटीकता, पारदर्शिता और दक्षता में इजाफा होगा.

45 दिनी राष्ट्रव्यापी गणना 3 नवंबर से 18 दिसंबर तक चलेगी, जिसमें हजारों प्रशिक्षित क्षेत्रीय कर्मचारी भाग लेंगे और नौ तटीय राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के 4,000 समुद्री मछली पकड़ने वाले गांवों के 12 लाख से ज़्यादा मछुआरे परिवारों को शामिल किया जाएगा.

यह जनगणना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग (डीओएफ) द्वारा समन्वित की जा रही है, जिसमें सीएमएफआरआई नोडल एजेंसी और भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई) परिचालन भागीदार है.

जॉर्ज कुरियन ने सभी राज्य मत्स्य पालन विभागों, स्थानीय निकायों और सामुदायिक संगठनों से ‘स्मार्ट जनगणना, स्मार्टर फिशरीज’ पहल को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग देने का आह्वान किया.

समुद्री मत्स्य पालन में सुधार के लिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार मछुआरों के लाभ के लिए सक्रिय रूप से फ्री ट्रांसपोंडर और कछुआ निष्कासन उपकरण स्थापित कर रही है.

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