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Fish Farming: बिहार में 70 करोड़ की लागत से बनेगा फिश मॉल

लोग अपने एक्वेरियम में नौ गोल्ड फिश सेट जरूर रखते है.
गोल्ड फिश

नई दिल्ली. सरकार फिशरीज सेक्टर से किसानों को जोड़ना चाहती है. ताकि इस सेक्टर से जुड़कर किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाए. बिहार में भी मछली पालन के काम को बढ़ावा सरकार की तरफ से दिया जा रहा है. जिसका फायदा भी वहां के तमाम किसानों को मिल रही है. अब सरकार एक ऐसा काम करने जा रही है, जिससे आम लोगों को आनंद उठाने का मौका मिलेगा तो वहीं इससे मछली पालकों को भी फायदा मिलेगा. असल में बिहार के नालंदा और राजगीर में आने वाले पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सिलाव के मोहनपुर (नालंदा मोड़) के पास जल्द ही 70 करोड़ की लागत से फिश मॉल आकार लेगा.

ये फिश मॉल सैलानियों के लिए नया ठिकाना होगा. साथ ही, मछली पालकों के लिए उपयोगी भी. इसकी कवायद तेज हो गई है. सोमवार को पटना से आए आर्किटेक्ट अमित कुमार और मत्स्य विभाग की टीम ने चिहित तीन एकड़ 80 डिसमिल जमीन का मुआयना किया. अब जल्द ही इसकी फाइनल डिजाइन और एस्टीमेट तैयार कर टेंडर निकाला जाएगा.

टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनेगा
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बनने वाला यह मॉल मत्स्यपालन के क्षेत्र में वन स्टॉप सॉल्यूशन साबित होगा.

यह मॉल सिर्फ मछली बाजार नहीं, बल्कि एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन होगा. चार मंजिला (जी प्लस श्री) इमारत में 20 से अधिक दुकानें होंगी.

यहां मछली पालकों को जाल, रसायन, दवा, प्लास्टिक उपकरण और फीड (चारा) एक ही जगह मिल जाएगा.

वहीं, पर्यटकों के लिए यहां रंगीन मछलियों की गैलरी और लजीज व्यंजनों का रेस्टोरेंट आकर्षण का केंद्र होगा.

मॉल का एस्टीमेट और निर्माण कार्य समय पर हो, इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग हो रही है.

चार मंजिला मॉल में क्या रहेंगी सुविधाएं
फिश मॉल में बेसमेंट में वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था होगी.

ग्राउंड फ्लोर भव्य एक्यूवेरियम गैलरी, कोल्ड स्टोरेज, ऑफिस और टिकट काउंटर बनाया जाएगा.

पहले तल पर रंगीन मछली, जाल, दवा, उपकरण की दुकाने और रेडी टू ईट’ रेस्टोरेंट बनेगा.

दूसरे तल पर ऑडिटोरियम और मीटिंग हॉल (प्रशिक्षण व सेमिनार के लिए) होगा.

वहीं तीसरे तल पर गेस्ट हाउस (विश्राम गृह) और ओपेन जिम होगा.

निष्कर्ष
नालंदा और राजगीर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है. यहां एक्वा टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं. फिश मॉल बनने से पर्यटकों को घूमने की एक नई जगह मिलेगी. मछली खाने के शौकीनों को हाइजीनिक और ताजी डिश मिलेगी. किसानों को आधुनिक तकनीक और बाजार एक ही छत के नीचे मिलेगा.

Written by
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