नई दिल्ली. सरकार का मानना है कि पशुपालन करके किसान अपनी इनकम को बढ़ा सकते हैं. इसलिए पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. पशुपालन में बकरी पालन एक शानदार काम है. बकरी को गरीबों की गाय कहा जाता है और ये काम ऐसे परिवारों के लिए एटीएम की तरह है. किसान जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से बेचकर तुरंत फायदा हासिल कर सकते हैं. वहीं बिहार की जलवायु भी बकरी पालन के लिए अनुकूल है और यहां इसके विकास की असीम संभावनाएं हैं. जिसका फायदा यहां के लोगों को मिल सकता है.
ये बातें सोमवार को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री सुरेंद्र मेहता ने कही है. असल में मंत्री जलवायु अनुकूल बकरी पालन एवं प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस मौके पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बकरी पालन पर 60 से 90 फीसदी तक अनुदान दे रही है.
किसानों को किया जा रहा है प्रशिक्षित
उन्होंने कहा कि बकरी पालन के लिए बड़े पैमाने पर किसानों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है.
आने वाले दिनों में बकरी के मांस के साथ-साथ इसके दूध के व्यवसाय को बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा.
कार्यक्रम में विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि बकरी के दूध की काफी अधिक मांग है.
ऐसे में बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए इसे सुधा के माध्यम से बेचने का प्रयास किया जा रहा है.
बिहार में 1.28 करोड़ बकरियां हैं और संख्या के आधार पर राज्य देश में चौथे स्थान पर है.
उन्होंने बताया कि राज्य में बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में गोट सिमेन बैंक की स्थापना की योजना को स्वीकृति दी गई है.
जिससे नस्ल में गुणात्मक सुधार, मेमनों की मृत्युदर में कमी और उत्पादन में वृद्धि होगी. इसका फायदा किसानों को होगा.
इस मौके पर बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डा. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि बिहार में रोजगार सृजन योजना के तहत पशुपालन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
पशुओं से जुड़ी चिकित्सा और शोध को बेहतर कर बकरी पालन को और ज्यादा फायदेमंद बनाया जा सकता है.
केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा के निदेशक डा. मनीष कुमार चाटली ने कहा कि बकरों के मांस की मांग के साथ-साथ बकरियों के दूध और पनीर की कीमत भी बाजार में ज्यादा है. जिसका फायदा किसानों को मिल सकता है.
इस दौरान पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह, नाबार्ड के महाप्रबंधक अजय साहू सहित कई अन्य ने भी अपनी बातें रखीं.










