नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की सरकार राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने की योजना पर काम कर रही है. यही कारण है कि ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ में पशुपालन को भी एक महत्वपूर्ण विभाग के रूप में साथ में जोड़ा है. दूध उत्पादन के मामले में मध्य प्रदेश वर्तमान में देश में तीसरे स्थान पर है. इस रैकिंग को सुधारने का प्रयास हो रहा है और राज्य को दूध उत्पादन के मामले में पहले पायदान पर लाने के लिए काम हो रहा है. ताकि राज्य को मिल्क कैपिटल बनाया जा सके. इस उद्देश्य के तहत मध्य प्रदेश सरकार गौपालन और पशुपालन को बढ़ावा देते हुए हर संभव प्रयास कर रही है.
बता दें कि हाल ही में सरकार ने ‘पशुपालन विभाग’ का नाम बदलकर ‘गौपालन, पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग’ कर दिया है. इसके अलावा मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में भी पशुपालन को आवंटित की जाने वाली राशि बढ़ाकर 2,365 करोड़ रुपये की है. इस तरह गौपालन एवं पशुपालन विभाग के लक्ष्यों को तेजी के साथ पूरा किया जा सकेगा. ये बातें मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री लखन पटेल ने कही.
250 करोड़ रुपए का किया प्रावधान
पशुपालकों को स्वरोजगार देने और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार ने ‘मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना’ के लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.
इसके तहत पशुपालन को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर प्रोत्साहित किया जा रहा है.
प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में ‘मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना’ अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन एवं प्रबंधन के लिये राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ अनुबंध किया जा चुका है.
इस अनुबंध से दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या तथा दुग्ध संकलन में अनोखी बढ़ोतरी हुई है. वर्तमान में मध्यप्रदेश में दुग्ध संकलन में 25 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी की गई है.
पूर्व में प्रदेश में दुग्ध संकलन 10 लाख लीटर प्रतिदिन था, जो अब वर्तमान में बढ़कर 12.5 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच चुका है.
इतना ही नहीं, प्रदेश में वर्तमान में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दुग्ध उपलब्धता करीब 707 ग्राम है, जो इसके राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम से लगभग 46 प्रतिशत अधिक है.
मध्यप्रदेश की इस अनोखी उपलब्धि का श्रेय भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में किए गए विशेष प्रयासों को जाता है.
वहीं सरकार ने बताया कि गौ पालन को बढ़ावा देना एवं पशुओं का संवर्धन मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है. इसे देखते हुए बजट में 621 करोड़ रुपये की राशि के विशेष प्रावधान किए गए हैं.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गौपालन को लेकर दूरदर्शी सोच रखते हैं. उनकी अभिलाषा थी कि प्रदेश की गौशालाएं आर्थिक रूप से मजबूत होकर स्वावलंबी बनें और निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन का स्थायी समाधान निकाला जा सके.












