नई दिल्ली. मध्य प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में आम लोगों और पशुपालकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अहम कदम उठाए हैं. सरकार की ओर से द्वार के तर्ज पर क्रांतिकारी कदम ‘दुग्ध संपर्क समृद्धि अभियान’ तीन चरणों में चलाया जा रहा है. इसके दो पूरे चरण पूरे हो चुके हैं, जिनके माध्यम से प्रदेश के करीब 12 लाख घरों तक संपर्क साधा जा चुका है. मध्य प्रदेश सरकार ‘क्षीर धारा ग्राम योजना’ का संचालन भी कर रही है, जिसमें पहले चरण में प्रदेश के 55 जिलों में करीब 5000 गांव चिह्नित किए गए हैं.
इनके माध्यम से ऐसे गांवों का विकास किया जा रहा है, जिनमें पशुपालकों द्वारा उन्नत तरीके से पशुपालन किया जाता है. इन ग्रामों में पशुपालकों द्वारा उन्नत नस्ल के पशु, उनके रखरखाव के आधुनिक तरीके, पशु पोषण व पशु उपचार की आधुनिक व्यवस्थाएं, पशु टीकाकरण तथा गोबर व गौमूत्र का समुचित मूल्य संवर्धन आदि गतिविधियां की जाती हैं.
नस्ल सुधार के लिए हो रहा है काम
इतना ही नहीं मध्यप्रदेश शासन द्वारा दुधारू नस्लों के संवर्धन के लिये विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई है, जिसके तहत पशुपालकों को एक मंच पर लाने के लिए ब्रीडर एसोशिएशन का गठन किया जाएगा.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में विश्वास रखते हैं और यही कारण है कि गौवंश से उत्पादित गोबर आदि संसाधनों का इस्तेमाल कर बायो सीएनजी भी उत्पादित की जा रही है.
इस क्रम में ग्वालियर स्थित आदर्श गौ-शाला में देश के पहले 100 टन क्षमता वाले सीएनजी प्लांट की स्थापना की गई है.
वहीं आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर, एवं उज्जैन में आदर्श गौशालाएं स्थापित की गई हैं.
इसके अलावा भोपाल, जबलपुर और सागर में आदर्श गोशालाओं के निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं.
गौपालन, पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग का लक्ष्य राज्य में औसत दुग्ध संकलन आगामी तीन वर्षों में 33 लाख लीटर प्रतिदिन से अधिक करने का रखा गया है.
इसके साथ ही सहकारिता अंतर्गत ग्रामों का कवरेज आगामी 3 वर्षों में बढ़ाकर 15000 से अधिक ग्रामों को करने और दुग्ध सहकारी समिति सदस्यों की संख्या बढाकर कुल 4 लाख 70 हजार करने का लक्ष्य भी तय किया गया है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बहु आयामी दूरदृष्टि व मार्गदर्शन में पशुपालकों की आय बढ़ाने, निराश्रित गौवंश को स्थायी आश्रय दिलाने, गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्नत नस्ल के पशु तैयार के साझा प्रयास किए जा रहे हैं.
वह दिन अब दूर नहीं जब मध्यप्रदेश का दुग्ध उत्पादन में नंबर वन और देश की मिल्क कैपिटल बनने का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सपना साकार होगा.












