नई दिल्ली. डेयरी फार्मिंग का बिजनेस करने वाले तमाम डेयरी फार्मर्स बोवाइन एम्ब्रियो ट्रांसफर की अहमियत को जानते हैं. जिसका फायदा भी उन्हें मिल रहा है. वहीं राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB ने पशुपालन और डेयरी विभाग के सहयोग से आनंद में इसको लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें प्रमुख विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग के हितधारक एक साथ आए. जहां इसकी जरूरत पर बातचीत की गई. साथ ही इसमें आ रही तमाम अड़चनों पर भी चर्चा हुई. साथ ही इसका क्या हल है, इसपर भी बात हुई.
इस मौके पर NDDB के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी. शाह ने अपने संबोधन में इस बात पर ज़ोर दिया कि एम्ब्रियो ट्रांसफर भारत के पशुधन क्षेत्र में आनुवंशिक प्रगति को तेज करने का एक शक्तिशाली साधन है. उन्होंने मजबूत IVF प्रयोगशालाओं, एम्ब्रियो उत्पादन में वृद्धि और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के माध्यम से हो रही लगातार प्रगति का उल्लेख किया, साथ ही कुछ प्रमुख चुनौतियों—जैसे कि बेहतरीन डोनर का चयन, उच्च लागत, जमे हुए एम्ब्रियो से गर्भधारण की कम दरें और कुशल मानवशक्ति की आवश्यकता—को भी रेखांकित किया.
एम्ब्रियो ट्रांसफर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
उन्होंने जीनोमिक्स को ET के साथ एकीकृत करने, लागत-प्रभावी स्वदेशी समाधानों को बढ़ावा देने और सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया.
इसके साथ ही उन्होंने क्षमता निर्माण और ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के माध्यम से NDDB द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया.
NDDB के SGM (उत्पादकता संवर्धन) डॉ. आर.ओ. गुप्ता ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वैश्विक स्तर पर हो रही प्रगति के बावजूद, ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के तहत ET को अपनाने में कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.
जैसे कि उच्च लागत, कौशल में कमी और ज़मीनी स्तर पर लोगों की धारणाएं. उन्होंने इस कार्यशाला को आगे की राह तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया.
इस कार्यशाला में कई प्रख्यात विशेषज्ञों ने भाग लिया. जिनमें पद्म श्री डॉ. एम.एल. मदन, प्रो. ए.के. मिश्रा (ASRB के पूर्व अध्यक्ष और महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नागपुर मौजूद रहे.
इस कार्यशाला ने वर्तमान चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने और भारत के एम्ब्रियो ट्रांसफर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक रूप से एक रूपरेखा तैयार करने के लिए एक मंच प्रदान किया.











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