नई दिल्ली. मछली पालन के काम में मौसम के हिसाब से सभी मछलियों और तालाब आदि का प्रबंधन करना होता है. इससे मछलियों को मौसम की वजह से होने वाली परेशानी से निजात मिलती है. वहीं मछलियों की ग्रोथ सही रहती है. नतीजे में मछली पालकों को अच्छी फसल मिलती है और मछली का ज्यादा उत्पादन होने से इस काम में मछली पालकों को खूब मुनाफा होता है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से इसी से जुड़ी कुछ अहम जानकारी साझा की गईं हैं.
एक्सपर्ट के मुताबिक अप्रैल में मछली पालन के लिए तालाब बनाने के लिए उपयुक्त स्थान का चुनाव करना चाहिए. साथ ही साथ पुराने तालाबों का सुधार व मरम्मत करनी चाहिए. इसके अलावा नये तालाबों का निर्माण का काम शुरू कर देना चाहिए. वहीं मछली बीज उत्पादक ग्रास कार्प के लिए ब्रीडिंग हैचरी में शुरू करें दें.
पोटाशियम परमेग्नेट 400 ग्राम प्रति एकड़ डालें
बदली (बरसात) के दिनों के दौरान ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, इसलिए ऐसी स्थिति में ऐयरेंशन या जल पुनर्चक्रण की व्यवस्था करनी चाहिए.
ऐसे मौसम में मछलियों को बीमारी से बचाने के लिए पोटाशियम परमेग्नेट 400 ग्राम प्रति एकड़ प्रति मीटर पानी की गहराई की दर से प्रयोग करना चाहिए.
आर्गुलस और जलीय कीड़ों का तालाब में संक्रमण होने पर कीड़ा मारने वाली दवा, जैविक एवं रासायनिक उर्वरक का प्रयोग विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना चाहिए.
हैचरी संचालक या मछली बीज उत्पादक अच्छे अंडों का फर्टिलाइजेशन दर व स्पान की उत्तरजीविता के लिए प्रोटीन युक्त आहार, प्रोबायोटिक एवं सुक्ष्म खनीज तत्वों का प्रयोग मछली के आहार में करें.
हैचरी संचालक व मत्स्य बीज उत्पादक नर व मादा ब्रूडर मछलियों का अलग-अलग तालाब में 15 दिन से एक महीनों के लिए विभाजन करें.
तालाब में जलीय कीटों, खरपतवार एवं अवांछनीय मछलियों की सफाई समय-समय पर अवश्यकतानुसार कराते रहना चाहिए.
इस महीने में तालाब में कॉमन कार्प मत्स्य बीज का संचय करना चाहिए.
तालाब में मत्स्य बीज संचय से पहले 150-250 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बुझे हुए चूने का प्रयोग करें.
प्लैंकटॉन नेट से नर्सरी/तालाब के पानी में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता की जांच समय-समय पे करनी चाहिए.
तालाब में जाल चलवाकर संचित मत्स्य बीज की प्रगति एवं स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर करते रहना चाहिए एवं कुल शरीर भार के अनुसार भोजन के मात्रा का भी निर्धारण करते रहना चाहिए.
तालाब में पूरे वर्ष कम से कम 1.5 मीटर पानी का स्तर बना रहे ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए.
माह के अन्त में तालाब में जाल चलाएं (पंगेशियस मछली वाले तालाब में जाल चलाना वर्जित है).












