नई दिल्ली. नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय कुमार बेहरा ने भीमावरम क्लस्टर के लिए अगले पांच वर्ष की योजना पर प्रस्तुति दी. उन्होंने वैल्यू चेन से जुड़े सभी संबंधित पक्षों से की जाने वाली अपेक्षाओं पर बल दिया. टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार-उन्मुख उपायों के जरिए भीमावरम फिशरीज क्लस्टर को मजबूत करने के बारे में सुझाव दिए. सीआईबीए ने हैचरी और जेनेटिक सुधार टेक्नोलॉजी, झींगा-सीवीड की एकीकृत खेती के मॉडल, बेहतर बायो-सिक्योरिटी के साथ अत्यधिक सघन झींगा पालन, बीमारी की निगरानी, ट्रेसिबिलिटी सिस्टम और मछली के कचरे के इस्तेमाल में हुई प्रगति की जानकारी दी.
एमपीईडीए ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भीमावरम में क्षेत्रीय कार्यालय और दो टेस्टिंग लैब्स की स्थापना के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने नियमित क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों और सर्टिफिकेशन व ट्रेसिबिलिटी के बारे में किसानों को जागरूक करने के प्रयासों के बारे में भी बताया. नाबार्ड ने क्लस्टर में ‘फिश फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन’ (एफएफपीओ) के गठन में हुई प्रगति और पूरे क्लस्टर में वित्तीय समावेशन को बेहतर बनाने के लिए क्षेत्रीय बैंकों के साथ ऋण संबंधों को मज़बूत करने पर जोर दिया.
किसानों ने पीएमएमएसवाई से मिले सहयोग सराहा
सीएमएफआरआई ने खारे पानी की प्रमुख प्रजातियों के लिए हैचरी टेक्नोलॉजी के विकास, सीवीड से बनने वाले वैल्यू-एडेड उत्पादों से जुड़ी पहलों, कृत्रिम रीफ की स्थापना और बहु-प्रजाति जलीय कृषि, नर्सरी व जीवित मछलियों के परिवहन को बढ़ावा देने के लिए अवसंरचना संबंधी सहायता की आवश्यकता पर बल दिया.
बैठक के दौरान, मछली किसानों ने ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) के तहत मिल रहे सीधे सहयोग की सराहना की.
हालांकि, उन्होंने कई ऐसी चुनौतियों का भी जिक्र किया, जिन पर विशेष रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है.
मुख्य चिंताओं में बाजार से कमजोर जुड़ाव और घरेलू खपत को बढ़ावा देने की आवश्यकता शामिल थी.
इसके लिए उन्होंने सरकारी कैंटीन, अस्पतालों और मध्याह्न भोजन योजनाओं में मछली व समुद्री भोजन को शामिल करने का सुझाव दिया.
किसानों ने बीमारियों और वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए ‘ब्रूडस्टॉक’ (प्रजनन के लिए रखी गई मछलियां) और ‘सीड’ (मछली के बीज) की गुणवत्ता पर कड़े नियम लागू करने और उनकी निगरानी करने के महत्व पर जोर दिया.
इसके साथ ही उन्होंने बीमारियों का सामना करने में सक्षम ब्रूडस्टॉक को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की. संस्थागत लोन तक सीमित पहुंच को बड़ी बाधा बताया गया.
इसके साथ ही, किसानों ने जलीय कृषि गतिविधियों को भी कृषि के समान ही आयकर में छूट देने का अनुरोध किया.
किसानों ने उत्पादकता और मुनाफ को बढ़ाने के लिए बेहतर वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों और क्षमता-निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया.
यह भी बताया गया कि उत्पादन लागत का लगभग 70% हिस्सा ‘फ़ीड’ (मछलियों के भोजन) पर खर्च होता है, इसलिए उन्होंने फ़ीड की गुणवत्ता में सुधार करने का अनुरोध किया.
आईओटी-आधारित टेक्नोलॉजी को अपनाने की इच्छा व्यक्त करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन टेक्नोलॉजी को अपनाना तभी संभव हो पाएगा, जब इसके लिए आवश्यक उपकरण रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जाए.











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