नई दिल्ली. मुर्गी पालन के काम में टेंपरेचर का बेहद ही महत्व होता है. बहुत कम टेंपरेचर मुर्गियों को नुकसान पहुंचा सकता है जबकि गर्मी में ज्यादा टेंपरेचर भी मुर्गियों के लिए खतरा होता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि आमतौर पर चूजों को 32 डिग्री से 35 डिग्री टेंपरेचर दिया जाता है. जबकि मुर्गी या मुर्गे या जब बड़े हो जाते हैं तो उन्हें 20 से 24 डिग्री टेंपरेचर की जरूरत होती है. बात अगर गर्मी की करें तो इस वक्त टेंपरेचर 40 डिग्री के पार हो चुका है. ऐसे में एक मुर्गी पालक के तौर पर टेंपरेचर को मेंटेन करना बेहद जरूरी है, नहीं तो नुकसान बड़ा हो सकता है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि बहुत से मुर्गी पालक टेंपरेचर को मेंटेन करने में गलती कर जाते हैं. जैसे मुर्गियों पर पानी का छिड़काव कर देते हैं. ऐसा करना बिल्कुल भी सही नहीं है. एक्सपर्ट के मुताबिक ये उल्टा मुर्गियों को और ज्यादा परेशान कर सकता है और उनमें मृत्यु दर का कारण भी बन सकता है. कभी भी सीधे तौर पर पानी से मुर्गियों को नहीं भिगोना चाहिए. आइए जानते इसके क्या नुकसान हैं ये भी जानते हैं कि गर्मी में टेंपरेचर को कैसे मेंटेन करना है.
निमोनियम का होता है खतरा
एक्सपर्ट का कहना है कि मुर्गियों के शरीर पर सीधे पानी डालने से उन्हें निमोनिया या सांस संबंधित बीमारियों सकती हैं.
अगर हवा में नमी है और मुर्गियों का शरीर गीला है इसकी वजह से उनके शरीर का तापमान और ज्यादा बढ़ सकता है.
मुर्गियां पानी से बहुत ज्यादा प्यार नहीं करती हैं. अगर उन पर सीधे पानी डाल दिया जाता है तो इससे वह बहुत ज्यादा तनाव में आ जाती हैं.
मुर्गियों का पंख गीला होने के चलते खराब हो सकता है और वह अपनी गर्मी को नियंत्रित नहीं कर पाती हैं.
वहीं सीधे पानी डालने की वजह से शेड का फर्श भी भीग सकता है. इसके चलते अमोनिया गैस पनप सकती है.
अमोनिया गैस की वजह से मुर्गियों को बहुत परेशानी होती है और उनकी मौत का कारण भी यह बन सकती है.
इसलिए मुर्गियों को गर्मी से बचाने के लिए शेड की छत पर परली खास या जूट के बोरे डालकर उन्हें गीला करें.
निष्कर्ष
सीधे मुर्गियों पर पानी न डालें. एग्जास्ट पंखे कूलर या आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं. पीने के लिए ताजा ठंडा पानी उपलब्ध करा सकते हैं मुर्गियों के पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स और विटामिन सी मिलकर देना चाहिए. इससे उन्हें गर्मी से बचाया जा सकता है.












