Home पशुपालन Fodder: हरे चारे का उत्पादन बढ़ाने के लिए नेपियर घास रूट स्लिप समेत हरे चारे के बीजों का किया जा रहा वितरण
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Fodder: हरे चारे का उत्पादन बढ़ाने के लिए नेपियर घास रूट स्लिप समेत हरे चारे के बीजों का किया जा रहा वितरण

नेपियर घास.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में किसानों, पशुपालकों और चारागाहों में हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पशुधन विभाग तेजी से प्रयास कर रहा है. इसके लिए नेपियर घास रूट स्लिप, बरसीम और ज्वार चारा बीज किसानों और पशुपालकों को वितरित किया जा रहा है. पशुधन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य विभाग अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि प्रदेश की योगी सरकार का लक्ष्य है कि पशुओं के लिए साल भर पोषक और सस्ता हरा चारा उपलब्ध कराया जाए, जिससे किसानों की लागत कम हो और दूध उत्पादन में वृद्धि हो.

अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि इस साल हजारों हेक्टेयर में हरा चारा उगाने के लिए प्रदेश के 75 जिलों में काम शुरू हो चुका है. इसी क्रम में करोड़ों रुपये विभाग खर्च कर रहा है. सबसे ज्यादा फोकस प्रदेश में नेपियर घास की पैदावार बढ़ाने पर किया जा रहा, जिसकी कटाई साल भर में 6 बार तक की जा सकती है. साथ ही हरा चारा उगाने के लिए हर जिले में दो मास्टर ट्रेनर भी तैयार किए जा रहे हैं, जो कि जिलों में किसानों और पशुपालकों को हरा चारा उगाने की ट्रेनिंग भी देंगे.

हरे चारे के लिए विभाग ने वितरित किए बीज
प्रक्षेत्र एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील कुमार राय ने बताया कि अतिरिक्त चारा विकास कार्यक्रम के तहत किसानों, पशुपालकों को बरसीम और ज्वार चारा बीज का वितरण किया गया है. जिससे 4,156 हेक्टेयर में हरे चारे की पैदावार होगी.

इस पर 2 करोड़ रुपये विभाग ने खर्च किए हैं। वहीं नेपियर घास की पैदावार इस साल 230 हेक्टेयर में कराने का लक्ष्य है, जिसके तहत 60 लाख नेपियर रूट स्लिप का वितरण 75 जिलों में किया जा चुका है.

इस पर विभाग ने 64 लाख रुपये खर्च किए हैं. वहीं किसानों को प्रोत्साहन के लिए 4 हजार रुपये भी दिए गए.

गो आश्रय स्थल से संबंद्ध एवं अन्य गोचर चारागाह की भूमि पर हरा चारा उत्पादन की योजना के तहत 2,815 हेक्टेयर में हरा चारा उगाने के लिए ज्वार, मक्का व बाजरा के बीज वितरित किए गए हैं. इस पर विभाग ने 6.5 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि हमारा लक्ष्य सिर्फ बीज वितरण तक ही सीमित नहीं है। इनकी पैदावार अच्छी हो, उस पर भी ध्यान दिया जा रहा है.

इस क्रम में हर जिले से दो अधिकारियों (एक कृषि विभाग से, दूसरा पशुपालन विभाग से) को भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान झांसी में ट्रेनिंग दिलाई जा रही है.

यही मास्टर ट्रेनर के रूप में विकास खंडों पर पशुपालकों को सही तरीके से चारा उगाने की ट्रेनिंग देंगे.

इसके अलावा हर जिले से 15-15 किसानों और पशुपालकों को चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए तकीनीकी संस्थाओं एवं विभागीय प्रक्षेत्रों में एक्सपोजर विजिट कराई जा रही है.

उन्होंने बताया कि पशुपालकों से लेकर, प्रदेशभर की गोशालाओं में हरे चारे की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं. इसका परिणाम इसी वर्ष से दिखने भी शुरू हो जाएंगे.

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