नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में सिर्फ मुर्गी पालन ही नहीं होता है. बल्कि कई और काम भी किए जाते हैं. जबकि ज्यादातर किसान यही सोचते हैं कि पोल्ट्री फार्मिंग का मतलब सिर्फ मुर्गी पालन है. पोल्ट्री फार्मिंग और क्या-क्या किया जा सकता है. इसमें क्या दिक्कतें आती हैं, समेत कई अहम जानकारी पोल्ट्री फार्मर्स से साझा की गई. असल में केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर में दिनांक 11-15 मई 2026 तक जारी 5 दिवसी हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) कुक्कुट पालन से उद्यमिता विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जहां ये अहम जानकारी दी गई.
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पोल्ट्री फार्मर्स पोल्ट्री फार्मिंग और प्रोसेसिंग प्रसंस्करण की नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों साथ ही बिक्री की बारीकियों से अवगत कराया गया. साथ ही पोल्ट्री बिजनेस से जुड़ने के लिए अवेयर किया गया.
क्या अहम जानकारी दी गई
डॉ. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा कुक्कुट पालन से संबंधित विभिन्न विषयों जैसे बैकयार्ड मुर्गी पालन, बटेर पालन, टर्की पालन, अंडा व मांस उत्पादन के लिए मुर्गी उक्त कार्यक्रम मे जापानी बटेर, टर्की, देसी फाउल, बतख पालन के बारे में बताया गयसा.
इसके साथ साथ ब्रॉयलर व लेयर उत्पादन प्रोद्योगिकियों व कुक्कुट पालन में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका आदि विषयों व अन्य तकनीकी विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया.
इसके अतिरिक्त पोल्ट्री व्यवसाय और इससे जुड़ी इकाइयों को स्थापित करने के लिए विधिक आवश्यकताओं, दायित्वों, प्रबंधन तकनिकी, आहार प्रबंधन, कुक्कुट बीमारियों के उपचार, विपणन, बीमा आदि सहित कुक्कुट उत्पादों की प्रसंकरण तकनीकी आदि पर विस्तार से प्रशिक्षित किया गया.
साथ ही विभिन्न बैंको से ऋण प्राप्ति हेतु विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने व सरकारी वित्त योजनाओं के विषय में जानकारी दी गई.
प्रशिक्षण न केवल संस्थान के वैज्ञनिकों द्वारा दिया जायेगा अपितु प्रासंगिक विषयों पर प्रशिक्षण हेतु कुक्कुट उद्द्योग से जुड़े विषय विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया.
उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंत मे प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र भी दिए जायेंगे जिनका उपयोग कुक्कुट उद्यमियों द्वारा अपना कुक्कुट व्यवसाय स्थापित करने तथा वित्तीय प्रबंधन हेतु बैंक ऋण आदि प्राप्त करने के लिए किया गया.
इस हाइब्रिड(ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में देश के 10 राज्यों से 4 महिला प्रशिक्षुओं सहित कुल 28 प्रशिक्षु प्रतिभाग किया था.
आज के उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक डॉ जगबीर सिंह त्यागी द्वारा पर प्रशुक्षुओं को संबोधित करते हुए उनसे नवीनतम तकनीक आधारित वैज्ञनिक कुक्कुट पालन अपनाने का आह्वान किया गया.
कार्यक्रम का संचालन डॉ संडीप सरन, मुख्य अन्वेषक, एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेन्टर ने किया.











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