नई दिल्ली. राजस्थान सरकार की तरफ से पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. जिसमें एक योजना अनुदान के आधार पर नर बकरा प्रदाय योजना भी है. जिसके जरिए किसानों को सब्सिडी पर एक बकरा दिया जा रहा है. इससे किसानों को नस्ल सुधार में मदद मिलेगी. इससे आने वाले समय में अच्छी कमाई भी हो सकती है. क्योंकि बकरी पालन एक अच्छा काम है और कम समय में इससे अच्छा खासा मुनाफा कमाया जा सकता है. इसलिए बकरी पालन को भी सरकार बढ़ावा दे रही है.
आपको बता दें कि बकरी दूध और मीट दोनों उद्देश्य के लिए पाली जा सकती है. इसलिए बकरी पालन में दोनों तरह से कमाई की जा सकती है. बकरी का दूध काफी महंगा बिकता है और इसकी डिमांड रहती है. जबकि बकरी का मीट भी अन्य मीट के मुकाबले बहुत महंगा होता है और इसकी डिमांड भी अच्छी है. बकरीद जैसे त्योहार पर बकरी पालकों को बकरों का मुंह मांगा दाम मिल जाता है.
बकरियों की नस्ल में सुधार लाना है मकसद
अनुदान के आधार पर नर बकरा प्रदाय योजना के उद्देश्य की बात की जाए तो
इसके जरिए देशी या स्थानीय बकरियों की नस्ल मे सुधार लाना है.
इस योजना में सभी वर्ग के बकरी पालक को उन्नत नस्ल का एक नर बकरा अनुदान के आधार पर सरकार की तरफ से दिया जा रहा है.
अच्छी बात ये है कि ये योजना प्रदेश के सभी जिलों में संचालित की जा रही है.
वहीं ये योजना सभी वर्ग के बकरी पालक, जिनके पास न्यूनतम 5 बकरियां हों उनके लिए है.
योजना के तहत जमनापारी, बरबरी और सिरोही नस्ल का बकरा दिया जाएगा.
इकाई लागत 8300 रुपए है. बकरे का मूल्य 7500 रुपए, बीमा राशि 2.75 प्रतिशत एक वर्ष के लिए यानि 206 रुपए और मिनरल मिक्सचर 394 रुपए व प्रशिक्षण बुकलेट व मॉनिटरिंग कार्ड केे लिए 200 रुपए है.
अनुदान सभी वर्ग के लिए 75 प्रतिशत एवं हितग्राही अंश 25 प्रतिशत तय है.
हितग्राहियों का ग्राम सभा में अनुमोदन. ग्राम सभा से अनुमोदित हितग्राहियों का जनपद पंचायत की सभा में अनुमोदन. जनपद पंचायत के अनुमोदन बाद जिला पंचायत की कृषि स्थाई समिति की बैठक में अनुमोदन प्राप्त करना होगा.
संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु औषधालय के प्रभारी और उपसंचालक पशु चिकित्सा से संपर्क कर सकते हैं.











