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Dairy: ‘भारत-जापान CBG पहल के जरिए एक हजार CBG और जैविक खाद प्लांट लगाने में मिलेगी मदद’

अहम चर्चा के दौरान पीएम मोदी व जापानी पीएम सनाए ताकाइची.

नई दिल्ली. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की मौजूदगी में आयोजित भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच ने दोनों देशों की ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ को और मजबूत किया. इस दौरान स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ विकास, तकनीक और आर्थिक सुरक्षा पर खास जोर दिया गया. एनडीडीबी के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह भी नई दिल्ली में आयोजित इस भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच में शामिल हुए. दोनों प्रधानमंत्रियों ने ‘भारत-जापान कोऑपरेटिव बायोगैस फॉर ग्रोथ (CBG) पहल’ की शुरुआत का स्वागत किया.

यह एक नई प्रमुख साझेदारी है, जिसका मकसद डेयरी सहकारी समितियों के बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल करके भारत में 1,000 CBG प्लांट और जैविक खाद प्लांट लगाने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करना है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी और ज्यादा मजबूत
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “भारत-जापान CBG पहल के जरिए हमें भारत में 1,000 CBG प्लांट और जैविक खाद प्लांट लगाने में मदद मिलेगी.

इससे हमारी ‘गोबरधन पहल’ और मजबूत होगी.” उन्होंने आगे कहा कि इससे “भारत के गांवों में स्थिरता, समृद्धि और ग्रामीण आजीविका को नई ताकत मिलेगी.”

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने भारत के विशाल बायोमास संसाधनों का जिक्र किया और कहा कि सहकारी संस्थाओं के जरिए ग्रामीण संसाधनों को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने का प्रधानमंत्री मोदी का विजन ग्रामीण विकास और ऊर्जा सुरक्षा में बदलाव लाने की क्षमता रखता है.

उन्होंने कहा कि जापान-भारत CBG पहल डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से पशुओं के गोबर और कृषि बायोमास से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के उत्पादन को बढ़ावा देगी और साथ ही स्टार्टअप, उद्यमों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोग का विस्तार करेगी.

वहीं दो नेताओं ने भारत भर में CBG प्लांट और जैविक खाद के उत्पादन को बढ़ाने के लिए जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय और भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (FAHD) के पशुपालन और डेयरी विभाग के बीच सहयोग ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया.

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) इस पहल को लागू करने में मदद करेगा और भारत भर में सहकारी विकास को मजबूत करेगा.

NDDB की ओर से कहा गया कि इस अहम पहल का हम स्वागत करते हैं और डेयरी सहकारी समितियों की ताकत का इस्तेमाल करके पशुओं के गोबर और कृषि बायोमास को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद और डेयरी किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसरों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

जिससे एक स्वच्छ, अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान मिल सके. जिसे पशुपालक और ज्यादा समृद्ध हो सकेंगे.

Written by
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