नई दिल्ली. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मत्स्य निदेशालय ने जिले के जिला पदाधिकारियों और पुलिस अधीक्षक के लिए मछली बीज, जीवित मछली, मत्स्य आहार एवं अन्य मत्स्य उत्पादों के निर्वाध परिवहन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि वेब दस्तावेजों के साथ परिवहन किए जा रहे मत्स्य उत्पादों को अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाएगा. साथ ही अवैध वसूली अथवा अनधिकृत हस्तक्षेप की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.
जारी पत्र में कहा गया है कि जिलों से होकर प्रतिदिन बड़ी मात्रा में मत्स्य बीज, जीवित मछली तथा अन्य मत्स्य उत्पादों का परिवहन होता है. हालांकि परिवहन के दौरान कई स्थानों पर अनावश्यक जांच, वाहन रोकने और अवैध वसूली की शिकायतें लगतार मिल रही हैं, जिससे मत्स्य कृषकों, मत्स्यजीवी सहकारी समितियों एवं व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
देरी होने पर होता है नुकसान
विभाग ने अपने निर्देश में कहा है कि जीवित मछली एवं मत्स्य बेज नाशवान (पैरिशेबल) श्रेणी के उत्पाद हैं.
इनके परिवहन में थोड़ी भी देरी होने पर गुणवत्ता और जीवितता प्रभावित होती है, जिससे किसानों और कारोबारियों को भारी क्षति होती है.
वैध दस्तावेजों के साथ परिवहन किए जा रहे मत्स्य बीज, जीवित मछली एवं अन्य मत्स्य उत्पादों के आवनमन में किसी भी प्रकार की अनावस्यक बाया उत्पन्न न की जाए.
यदि किसी स्तर पर अवैध वसूली या अनधिकृत हस्तक्षेप की शिकायत प्राप्त होती है तो उसका तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
पत्र के जरिए कहा गया है कि मछली पालन करने वाले किसानों और मछली बीज को यहां से वहां ले जाने वालों को बिना वजह परेशान न किया जाए.
जबकि बहुत से कारोबारियों ने पुलिस पर जबरन वसूली का आरोप भी लगाया है. जिसको देखते हुए सरकार की ओर इस तरह का कदम उठाया गया है.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि सरकार राज्य में मछली पालन के काम को बढ़ावा देना चाहती है. साथ ही ये भी चाहती है कि किसान इससे जुड़कर मछली पालन करें और उन्हें इसका फायदा मिले. किसानों की इनकम में इजाफा हो. कहा जा रहा है कि पुलिस की अवैध वसूली आदि मसले मछली पालन के काम को बढ़ावा देने में रुकावट भी हैं.












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