नई दिल्ली. दूध उत्पादन व फ़ार्म के कुल मुनाफ़े को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक फीडिंग तकनीकों का इस्तेमाल होना जरूरी है. अगर डेयरी किसान ऐसा करते हैं तो किसानों का फायदा कई गुना बढ़ सकता हे. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के एनिमल न्यूट्रिशन विभाग की ओर से आयोजित न्यूट्रिशनल टेक्नोलॉजीज प्रोग्राम में आए एक्सपर्ट ने कहा. इस दौरान प्रैक्टिल करके डेयरी किसानों को इसके फायदे भी बताए गए.
गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के एनिमल न्यूट्रिशन विभाग ने ‘डायरेक्टोरेट ऑफ़ एक्सटेंशन एजुकेशन’ के तहत डेयरी किसानों के लिए “न्यूट्रिशनल टेक्नोलॉजीज” (पोषण संबंधी तकनीक) पर पांच दिन का प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया.
उत्पादकता और मुनाफा बढ़ाने पर दिया गया जोर
समापन सत्र के दौरान, एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. आर.एस. ग्रेवाल ने पशुओं की उत्पादकता और मुनाफे को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खिलाने की प्रथाओं और आधुनिक पोषण तकनीकों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया.
उन्होंने प्रतिभागियों को डेयरी फार्मिंग समुदाय के फ़ायदे के लिए यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित तकनीकों और सलाहकारी सेवाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया.
एनिमल न्यूट्रिशन विभाग के प्रमुख और कोर्स डायरेक्टर डॉ. जेएस हुंदल ने बताया कि इस प्रोग्राम को संतुलित आहार तैयार करने, स्थानीय रूप से उपलब्ध चारे के संसाधनों का कुशल उपयोग की जरूरत है.
ऐसा करने और पशुओं के स्वास्थ्य, दूध उत्पादन व फ़ार्म के कुल मुनाफ़े को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक फीडिंग तकनीकों का प्रैक्टिकल अनुभव देने के लिए डिज़ाइन किया गया था.
ट्रेनिंग में मिनरल न्यूट्रिशन, फीड एनालिसिस, यूरिया मोलासेस मिनरल ब्लॉक्स (UMMB), बाईपास फैट टेक्नोलॉजी, संतुलित आहार तैयार करना, साइलेज और हे (सूखा चारा) बनाना सिखाया गया.
साथ ही फीड टेस्टिंग, एफ्लाटॉक्सिन मैनेजमेंट, मिनरल मिक्सचर तैयार करना, फीड मिल मशीनरी और फसल के अवशेषों का यूरिया ट्रीटमेंट जैसे विषयों पर लेक्चर और प्रैक्टिकल डेमो शामिल थे.
इस प्रोग्राम का समन्वय डॉ. जेएस सिद्धू और डॉ. संदीप उनियाल ने किया. पूरे प्रोग्राम के दौरान एनिमल न्यूट्रिशन विभाग के फैकल्टी सदस्यों ने लेक्चर दिए और प्रैक्टिकल डेमो दिखाए.
प्रतिभागियों ने ट्रेनिंग के प्रैक्टिकल स्वरूप की सराहना की और भरोसा जताया कि इससे मिली जानकारी उन्हें डेयरी उत्पादकता और मुनाफ़े को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खिलाने की प्रथाओं को अपनाने में मदद करेगी.










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