नई दिल्ली. जब आप अंडा उत्पादन के लिए पोल्ट्री फार्मिंग करते हैं तो कुछ मुर्गियां ऐसी होती हैं जो अंडों का उत्पादन करती हैं. जबकि कुछ मुर्गियां उम्रदराज हो जाती हैं और अंडों का उत्पादन बंद कर देती हैं. जबकि अंडे न देने वाली मुर्गियां किसी काम की नहीं रह जाती हैं और अंडा देने वाली मुर्गियां काम की होती हैं लेकिन फीड दोनों को ही देना पड़ता है. ऐसे में पोल्ट्री फार्मिंग की लागत बढ़ना तो लाजमी है. इसलिए अंडे न देने वाली मुर्गियों को तुरंत ही अलग कर देना चाहिए.
क्योंकि जब आपको उत्पादन ही कम मिलेगा तो जाहिर सी बात है कि पोल्ट्री फार्मिंग की लागत बढ़ जाएगी. मान लीजिए कि आपका फॉर्म में 100 मुर्गियां हैं, जिसमें से 75 अंडे दे रही हैं और 25 अंडे नहीं दे रही हैं तो इस तरह से फीड पर आने वाले खर्च को भी आप नहीं निकाल पाएंगे. इसलिए अंडे देने वाली और न देने वाली मुर्गियां की पहचान करना जरूरी है.
कैसे करें पहचान, जानें यहां
अगर आप अंडे देने वाली मुर्गियां की पहचान करना चाहते हैं तो इसके लिए दो तरीका है. दोनों ही तरीकों से ये काम किया जा सकता है.
पहला तरीका ये है कि इसके लिए आपको मुर्गियों का फिंगर टेस्ट करना होगा.
इसके लिए आप लोगों के पास अंडे देने वाली जो मुर्गियां हैं उन मुर्गियों को उल्टा पकड़ना होगा और उल्टा पकड़ने के बाद उसके पिछले हिस्से में दो हड्डियां की दूरी देखनी है.
अगर हड्डियों की दूरी 2 से 3 उंगली आसानी से जा रही है तो इसका मतलब यह है कि यह मुर्गी अंडे का उत्पादन करने वाली मुर्गी हैं.
जबकि एक ही उंगली जा रही है तो इसका मतलब यह है कि उस मुर्गी ने अंडे देना बंद कर दिया है.
इसकी पहचान करते ही तुरंत मुर्गियों को अलग कर देना चाहिए. जिससे पोल्ट्री फार्मिंग की लागत कम होगी और आपका मुनाफा बढ़ जाएगा.
वहीं इसका दूसरा भी तरीका है. दूसरे तरीके के मुताबिक मुर्गियों की कलंगी से भी उनके अंडा देने न देने की पहचान की जा सकती है.
अगर कलंगी लाल चमकदार और मुलायम होती है तो इसका मतलब है कि मुर्गी अंडा देने वाली है. जबकि जो मुर्गियां अंडे नहीं देती हैं उनकी कलंगी सूखी और फीके रंग की हो जाती है.
निष्कर्ष
आपको इस रिपोर्ट के जरिए ये बात तो समझ आ ही गई होगी कि अंडा देने वाली और न देने वाली मुर्गियों की पहचान करना सीख लिया तो खुद को काफी बड़े नुकसान से बचा सकते हैं.












