नई दिल्ली. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग ने देश में मत्स्य पालन के समग्र विकास के लिए कई पहलें की हैं. इनमें विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन शामिल है. नीली क्रांति पर केंद्र प्रायोजित योजना मत्स्य पालन का एकीकृत विकास और प्रबंधन, यह वित्त वर्ष 2015-16 से वित्त वर्ष 2019-20 तक 5 वर्षों की अवधि के लिए चलाया गया मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (एफ.आई.डी.एफ) यह वर्ष 2018-19 से चल रहा है. वहीं (iii) प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) और (iv) प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना (पीएमएमकेएसएसवाई).
इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 से मछुआरों और मछली पालकों को उनकी कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा प्रदान की है. मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग ने पिछले तीन वित्त वर्षों (2023-24 से 2025-26) के दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत विभिन्न राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के मत्स्य पालन और जल कृषि विकास प्रस्तावों को कुल 6,885 करोड़ 18 लाख रुपये की लागत से मंजूरी दी है. इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 3,159 करोड़ 83 लाख रुपये है.
2,208 करोड़ 74 लाख रुपये की निधि हुई है जारी
पीएमएमएसवाई के अंतर्गत विभिन्न स्वीकृत मत्स्य पालन और जल कृषि विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए पिछले तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) के दौरान राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को 2,208 करोड़ 74 लाख रुपये की केंद्रीय निधि जारी की गई है.
पीएमएमएसवाई के तहत पिछले तीन वित्त वर्षों (2023-24 से 2025-26) के दौरान स्वीकृत प्रस्तावों और जारी की गई.
केंद्र सरकार बढ़ती इनपुट लागत, बीमारियों के प्रकोप और अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्यों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए जैव सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है.
रोग निगरानी और निदान, सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों के प्रसार और मछली पालकों की क्षमता निर्माण जैसे कई उपाय लागू कर रही है.
पीएमएमएसवाई के अंतर्गत लागू राष्ट्रीय जलीय पशु रोग निगरानी कार्यक्रम (एनएसपीएएडी) के अंतर्गत, जलीय पशु रोगों की नियमित निगरानी, शीघ्र पता लगाना, रिपोर्टिंग और निगरानी की जाती है.
ताकि समय पर रोग प्रबंधन को सुगम बनाया जा सके और उत्पादन हानि को कम किया जा सके.
इसके अलावा, पीएमएमएसवाई के तहत झींगा पालन क्षेत्र की स्थिरता, लचीलापन और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने के उद्देश्य से काम हो रहा है.
जिसके तहत जलीय पशु स्वास्थ्य अवसंरचना, रोग निदान प्रयोगशालाओं, हैचरी और अन्य हस्तक्षेपों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई है.












