नई दिल्ली. पशुपालन में रिपीट ब्रीडिंग (Repeat Breeding) बेहद ही नुकसान पहुंचाती है. रिपीट ब्रीडिंग की बात करें तो जब किसी पशु में सामान्य हीट (गर्भाधारण योग्य) आने के बाद भी वह गर्भाधारण नहीं करता और फिर हीट में आता है, तो इस स्थिति को रिपीट ब्रीडिंग कहते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं में रिपीट ब्रीडिंग (बार-बार गर्भ न ठहरना) से पशु पालक को भारी आर्थिक और उत्पादन का नुकसान हो जाता है. इससे ब्यांत का समय लंबा हो जाता है और दूध उत्पादन कम हो जाता है.
इसलिए कोई भी पशुपालक कभी भी नहीं चाहता है कि पशु को रिपीट ब्रीडिंग हो. एक्सपर्ट का कहना है कि रिपीट ब्रीडिंग की यह स्थिति गाय, भैंस, बकरी, भेड़ आदि में पाई जाती है. यानि हर पशु में ये दिक्कत देखने को मिलती है.
इसके क्या हैं लक्षण
लक्षणों की बात करें तो सामान्य हीट लक्षण दिखना. समय पर हीट में आना (18-24 दिन पर).
बार-बार प्राकृतिक या कृत्रिम गर्भाधान (AI) करने के बावजूद गर्भाधारण नहीं होना.
पशु की दूध उत्पादन क्षमता में कमी आना.
कई बार गर्भाशय में संक्रमण (Infection) की वजह से ऐसा होता है.
पोषण की कमी, हार्मोन असंतुलन की वजह से भी होता है.
गुप्त रोग जैसे ब्रूसेलोसिस, IBR, ल्यूकोसिस आदि में ऐसा होता है.
अंडाशय की समस्या के चलते और गलत समय पर गर्भाधान कराने से.
नस्लीय कारण या अनुवांशिक कारण से भी रिपीट ब्रीडिंग की समस्या होती है.
क्या इसका निदान
हीट का रिकोर्ड रखना चाहिए. गर्भ परीक्षण (PD) 60-90 दिन बाद कराएं.
वजाइना परीक्षण और गर्भाशय की जांच कराएं.
आवश्यक होने पर खून की जांच कराएं.
उपचार एवं नियंत्रण के बारे में जानें
गर्भाशय की सफाई कराएं. हामोंन थेरेपी कराएं.
उचित पोषण और खनिज मिश्रण देना चाहिए.
समय पर हीट डिटेक्शन और सही समय पर गर्भाधान (AI) कराएं.
संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक उपचार कराएं.
विटामिन A, D3, E और खनिज दें.
नियमित डिवामिंग कराएं.
बचाव का तरीका जानें
पशु को संतुलित आहार जरूर दें.
हीट का समय पर पता लगाना और सही समय पर गर्भाधान कराएं.
नियमित टीकाकरण कराएं और डिवार्मिंग करें.
पशु का रहने का स्थान साफ-सुथरा रखें.
समय-समय पर पशु का स्वास्थ्य परीक्षण कराएं.
निष्कर्ष
रिपीट ब्रीडिंग से पशु की उत्पादकता कम होती है और आर्थिक नुकसान होता है. इसलिए समय पर कारण जानकर उचित उपचार करना बहुत जरूरी है. ताकि आपको नुकसान न उठाना पड़े.












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