नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में कड़कनाथ या फिर देसी मुर्गी में से किसी एक को पालना चाहते हैं और ये जानना चाहते हैं कि दोनों में से सही कौन सही रहेगी तो इस बात की जानकारी आपको इस रिपोर्ट में मिल जाएगी. पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि नए पोल्ट्री पालक अगर बजट में ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते तो देसी मुर्गी पालन सबसे सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प है. वहीं अनुभवी पोल्ट्री पालकों के लिए कड़कनाथ पालन बेहतर हो सकता है. क्योंकि उनके पास प्रीमियम खरीदारों, मार्केट तक सीधी पहुंच होगी, इससे कड़कनाथ पालन से काफी ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता.
कड़कनाथ मध्य प्रदेश के झाबुआ की मूल नस्ल की मुर्गी है. यह बाहर और अंदर (मांस, हड्डियां व अंग) दोनों से पूरी तरह काली होती है. इसके मांस में उच्च प्रोटीन, कम फैट और औषधीय गुण होते हैं. वहीं देसी मुर्गियां रंग-बिरंगी होती हैं और किसी भी ग्रामीण या सामान्य मौसम में आसानी से ढल जाती हैं.
कड़कनाथ के बारे में जानें
▶️ कड़कनाथ लगभग 1.2 से 1.5 किलो वजन हासिल करने में 5 से 6 महीने का समय लेती है.
▶️ इन्हें फ्री-रेंज, घर का बना दाना या हरा चारा खिलाकर दाने का खर्च कम किया जा सकता है.
▶️ देसी मुर्गियां लगभग 1.5 किलो वजन 4 से 5 महीने में हासिल कर लेती हैं.
▶️ इन्हें खुला छोड़ने पर ये घास, कीड़े-मकोड़े और बचा हुआ खाना खाकर दाने के खर्च में 40 फीसद से 50 परसेंट तक बचत करा देती हैं.
▶️ कड़कनाथ का मांस 600 से लेकर 1,200 या फिर 1,500 रुपए प्रति किलो क्षेत्र अनुसार बिक सकता है.
▶️ इसका एक अंडा 20 से 30 रुपए तक आसानी से बिक जाता है.
▶️ हर आम ग्राहक इसे रोज नहीं खरीद सकता, इसके लिए बड़े शहर, होटल या खास स्वास्थ्य कारणों (जैसे डायबिटीज मरीज) वाले टारगेट कस्टमर की जरूरत होती है.
देसी मुर्गियां के बारे में यहां पढ़ें
▶️ देसी मुर्गी का मांस 300 से 600 रुपए प्रति किलो तक बिकता है.
▶️ इसका एक अंडा 10 से 15 रुपए तक बिकता है.
▶️ लोकल मंडी या गांव-कस्बों में इनकी मांग हमेशा बनी रहती है.
▶️ इन्हें तुरंत बेचा कर कमाई की जा सकती है.
निष्कर्ष
यादि आप इस काम में नए हैं तो देसी मुर्गी पालन आपके लिए सबसे सुरक्षित और फायदेमंद हो सकता है. वहीं अनुभवी मुर्गी पालकों को कड़कनाथ मुर्गी पालन करना चाहिए. क्योंकि इससे कमाई बेहतर होगी.











